Navratri 2026: कौन हैं मां शैलपुत्री? नवरात्रि के पहले दिन होती है इनकी पूजा; जानिए कथा

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व शुरू हो गया है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है.

Pinterest
Reepu Kumari

Navratri 2026 Day 1: नवरात्रि का पहला दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं में उन्हें शक्ति, आस्था और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि सच्चे मन से माता की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना की जाती है. नवरात्रि के इस पावन अवसर पर घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है.

मां शैलपुत्री का स्वरूप भी भक्तों के लिए खास महत्व रखता है. धार्मिक चित्रण में माता वृषभ यानी बैल पर सवार दिखाई देती हैं. उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल का फूल होता है. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. नवरात्रि के पहले दिन भक्त माता को फूल, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं. पूजा के दौरान मंत्र जाप और आरती करने की परंपरा भी प्रचलित है.

ऐसे करें मां शैलपुत्री की पूजा

सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें. लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा और मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद माता को अक्षत, कुमकुम, फूल और धूप-दीप अर्पित करें. फल और प्रसाद चढ़ाने के बाद मंत्र जाप करें. पूजा के अंत में मां की आरती उतारें. श्रद्धालु चाहें तो दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं.


माता को क्या चढ़ाएं, किस भोग को माना जाता है शुभ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना शुभ माना जाता है. इसके अलावा फल, मिठाई और घर में तैयार सात्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है. पूजा में सफेद और पीले फूल चढ़ाने की परंपरा है. भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और श्रद्धापूर्वक माता को अर्पित करें. भक्त अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा की सामग्री चुन सकते हैं.

मां शैलपुत्री के मंत्र से करें आराधना

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है;

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः.

माता के ध्यान के लिए यह मंत्र भी पढ़ा जाता है:

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

क्या है मां शैलपुत्री की कथा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में देवी सती थीं. मान्यता है कि पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने से दुखी होकर सती ने अपने प्राण त्याग दिए थे. अगले जन्म में उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं. इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा की जाती है. भक्त माता से अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.