नई दिल्ली: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. भगवान श्रीकृष्ण के भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का उत्सव मनाते हैं. जन्माष्टमी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व माना जाता है. ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालु चंद्रोदय के समय का इंतजार करते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था. इसी कारण जन्माष्टमी की रात निशिता काल में बाल गोपाल की पूजा की जाती है. कई स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है.
पंडित वान्या आर्या के अनुसार जन्माष्टमी की रात व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को चंद्रदर्शन का इंतजार रहता है. दिए गए पंचांग के अनुसार चंद्रमा के दर्शन रात 11 बजकर 29 मिनट के आसपास होने की जानकारी दी गई है. इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा की जाती है.
द्रिक पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण पूजा के लिए निशिता काल का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इस दौरान श्रद्धालु विधि विधान से भगवान कृष्ण की पूजा कर सकते हैं.
नई दिल्ली में रात 11 बजकर 25 मिनट पर चंद्रोदय होने की जानकारी दी गई है. मथुरा वृंदावन में रात 11 बजकर 33 मिनट, कोलकाता में रात 11 बजे, जयपुर में रात 11 बजकर 30 मिनट और चेन्नई में रात 11 बजकर 55 मिनट पर चंद्रदर्शन का समय बताया गया है.
अहमदाबाद में रात 12 बजकर 05 मिनट, बेंगलुरु में रात 12 बजकर 06 मिनट, पुणे में रात 12 बजकर 10 मिनट, पटना में रात 10 बजकर 52 मिनट और लखनऊ व कानपुर में रात 11 बजकर 17 मिनट पर चांद निकलने की जानकारी दी गई है.
गुरुग्राम में रात 11 बजकर 24 मिनट, हैदराबाद में रात 11 बजकर 22 मिनट और मुंबई में रात 11 बजकर 40 मिनट पर चंद्रदर्शन का समय बताया गया है.
जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है. श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दिनभर जलाहार या फलाहार कर सकते हैं. इस दौरान सात्विक भोजन और आचरण रखने की मान्यता है.
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की धातु की प्रतिमा को एक पात्र में स्थापित करें. इसके बाद दूध, दही, शहद, शर्करा और घी से भगवान का अभिषेक करें. इसके बाद भगवान को साफ वस्त्र पहनाकर उन्हें झूले में विराजमान करें.