कलयुग के अंत की आहट, जगन्नाथ पुरी मंदिर की 500 साल पुरानी 7 भविष्यवाणियां; क्या सच हो रहे हैं ये संकेत?
ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी करीब 500 साल पुरानी भविष्यमालिका की भविष्यवाणियां एक बार फिर चर्चा में हैं. संत अच्युतानंद दास महाराज द्वारा लिखे गए इन कथित संकेतों को कई लोग कलयुग के अंतिम चरण से जोड़कर देखते हैं.
हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में शामिल ओडिशा का जगन्नाथ पुरी मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. इसकी वजह मंदिर की वास्तुकला या परंपराएं नहीं, बल्कि करीब 500 वर्ष पुरानी भविष्यमालिका में दर्ज वे कथित भविष्यवाणियां हैं, जिन्हें कई लोग वर्तमान समय की घटनाओं से जोड़कर देख रहे हैं. संत अच्युतानंद दास महाराज द्वारा लिखी गई भविष्यमालिका में कलयुग के अंतिम चरण से जुड़े कई संकेतों का उल्लेख मिलता है. इन कथित भविष्यवाणियों में मंदिर के झंडे, सुदर्शन चक्र, कल्पवृक्ष और अन्य घटनाओं का जिक्र है. हालांकि, इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें धार्मिक आस्था व मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाता है.
भविष्यमालिका में दर्ज हैं कई कथित संकेत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भविष्यमालिका में कहा गया है कि कलयुग अपने चरम पर पहुंचने पर भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की आस्था कमजोर होने लगेगी. मंदिर की परंपराओं में अव्यवस्था और धार्मिक मूल्यों पर सवाल उठने जैसी परिस्थितियों का भी उल्लेख मिलता है. कुछ लोग वर्ष 2015 में मूर्ति स्थापना के समय में हुए बदलाव को इसी कथित भविष्यवाणी से जोड़ते हैं.
मंदिर की संरचना और कल्पवृक्ष से जुड़े दावे
भविष्यमालिका में यह भी उल्लेख मिलता है कि एक समय ऐसा आएगा जब मंदिर से पत्थर गिरने लगेंगे, जिसे बढ़ते पाप का संकेत माना जाएगा. इसके अलावा मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कल्पवृक्ष के भयंकर चक्रवात में गिरने का भी जिक्र मिलता है. वर्ष 2019 में आए चक्रवात के बाद कुछ लोगों ने इन घटनाओं को भविष्यवाणी से जोड़कर देखा.
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झंडा और सुदर्शन चक्र को लेकर भी हैं मान्यताएं
कथित भविष्यवाणियों में मंदिर के शिखर पर लगे झंडे के समुद्र में गिरने और तेज हवाओं के कारण सुदर्शन चक्र के टेढ़ा होने जैसी बातें भी कही गई हैं. वर्ष 2019 के चक्रवात के दौरान इन घटनाओं से जुड़े दावे सामने आए थे. हालांकि, इन घटनाओं को लेकर कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है.
आग और गिद्ध से जुड़े संकेत भी चर्चा में रहे
भविष्यमालिका में मंदिर के झंडे में आग लगने और शिखर पर गिद्ध के बैठने को भी अशुभ संकेत बताया गया है. वर्ष 2020 में झंडे में आग लगने की घटना के बाद कुछ लोगों ने इसे कोरोना महामारी से जोड़कर देखा. वहीं, मंदिर के शिखर पर गिद्ध के बैठने की घटना को भी कई श्रद्धालुओं ने धार्मिक संकेत माना.
रक्त वर्षा और कल्कि अवतार की मान्यता
भविष्यमालिका की अंतिम कथित भविष्यवाणी रक्त वर्षा से जुड़ी बताई जाती है. कुछ लोगों ने समय समय पर ऐसी घटनाओं का दावा किया, लेकिन इनकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलयुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु कल्कि अवतार धारण करेंगे और उसके बाद सतयुग का आरंभ होगा. इन सभी बातों को आस्था का विषय माना जाता है, जिन पर अलग अलग लोगों की अलग अलग मान्यताएं हैं.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.