खत्म होने वाला है कलयुग...? जानें और कितना बचा है समय; पुराणों में जवाब मौजूद
पुराणिक मान्यता के अनुसार कलयुग की शुरुआत 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. यह महाभारत युद्ध के बाद श्रीकृष्ण के स्वर्गारोहण के समय माना जाता है. इस गणना के हिसाब से कलयुग की कुल आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष है. यानी अभी हम कलयुग के शुरुआती चरण में ही हैं.
Hindu Dharam Kalyug Age: हिंदू धर्म में समय को चार युगों में विभाजित किया गया है- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग. इन चारों को मिलाकर एक महायुग बनता है. कलयुग को सबसे अंतिम युग माना जाता है, जिसमें नैतिकता, सत्य और धर्म का ह्रास होता जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कलयुग की कुल अवधि कितनी है और यह कब शुरू हुआ?
कलयुग की शुरुआत 3102 ईसा पूर्व में हुई
सबसे प्रचलित पुराणिक मान्यता के अनुसार कलयुग की शुरुआत 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. यह महाभारत युद्ध के बाद श्रीकृष्ण के स्वर्गारोहण के समय माना जाता है. इस गणना के हिसाब से कलयुग की कुल आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष है. यानी अभी हम कलयुग के शुरुआती चरण में ही हैं.
सतयुग की अवधि 17,28,000 वर्ष, त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष, द्वापरयुग 8,64,000 वर्ष और कलयुग 4,32,000 वर्ष बताई गई है. इस लंबे समय के कारण कलयुग को धीरे-धीरे बदलने वाला युग कहा जाता है. इसमें शुरू में कुछ धर्म बचा रहता है, लेकिन समय के साथ झूठ, लोभ, हिंसा और अन्याय बढ़ता जाता है.
छोटी अवधि वाली मान्यताएं
कुछ विद्वान युगों की गणना को अलग तरीके से देखते हैं. एक मत के अनुसार हर युग की अवधि लगभग 1250 वर्ष है. इस हिसाब से पूरा युग चक्र सिर्फ 5000 वर्षों में पूरा हो जाता है. इस दृष्टिकोण को प्रतीकात्मक माना जाता है, जहां युग बदलाव तेजी से दिखते हैं. प्रसिद्ध विचारक परमहंस राजनारायण जी ने युगों को मानव समय के आधार पर समझाया.
उनके अनुसार:-
सतयुग – 1200 वर्ष
त्रेतायुग – 2400 वर्ष
द्वापरयुग – 3600 वर्ष
कलयुग – 4800 वर्ष
यह गणना देवताओं के समय के बजाय मनुष्यों की समझ के अनुसार है, जो अधिक व्यावहारिक लगती है. वैदिक और ज्योतिषीय नजरियावैदिक ग्रंथों में 'युग' शब्द का अर्थ हमेशा लाखों वर्ष नहीं होता. कई जगह इसे सामान्य समय या काल चक्र के रूप में इस्तेमाल किया गया है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पृथ्वी को राशि चक्र का एक पूरा चक्कर लगाने में करीब 25,920 वर्ष लगते हैं. कुछ विद्वान इसे भी एक बड़े युग चक्र से जोड़कर देखते हैं.
कल्कि अवतार और नया युग
पुराणों के अनुसार जब कलयुग में पाप और अधर्म चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु का दसवां अवतार कल्कि प्रकट होंगे. वे सफेद घोड़े पर सवार होकर तलवार लेकर आएंगे और अधर्म का संहार करेंगे. उनके आने के बाद कलयुग का अंत होगा और फिर से सतयुग की शुरुआत होगी.
आज के समय में कई ज्योतिषी कलयुग के प्रभाव को देखते हुए नैतिक पतन, प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक परिवर्तनों की चर्चा करते हैं. फिर भी हिंदू शास्त्र आशा देते हैं कि अंत में सत्य की जीत होती है. कलयुग हमें सिखाता है कि चाहे समय कितना भी बुरा हो, व्यक्तिगत स्तर पर सत्य, करुणा और धर्म का पालन हमेशा फलदायी होता है.