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कपड़ों से लेकर गहनों तक... घर में भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए मृतक की ये चीजें; पितृ दोष से जुड़ा है संबंध

मृतक के कपड़े यादों से जुड़े होते हैं, लेकिन गरुड़ पुराण के अनुसार इन्हें घर में लंबे समय तक रखना उचित नहीं माना जाता. इन्हें जरूरतमंदों को दान कर देना सबसे अच्छा उपाय है. इससे न सिर्फ आत्मा का मोह टूटता है बल्कि पुण्य भी मिलता है. दान करने से मृत आत्मा को शांति मिलती है और घर का माहौल भी सकारात्मक रहता है.

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Edited By: Antima Pal
कपड़ों से लेकर गहनों तक... घर में भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए मृतक की ये चीजें; पितृ दोष से जुड़ा है संबंध
Courtesy: AI

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की आत्मा की यात्रा और परिवार के कर्तव्यों का विस्तार से वर्णन है. मान्यता है कि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा कुछ समय तक घर, परिवार और अपनी पुरानी चीजों से मोह रखती है. अगर परिवार वाले मृतक की निजी वस्तुओं का इस्तेमाल करते रहें तो आत्मा को संसार से अलग होने में देरी हो सकती है. इससे आत्मा को शांति नहीं मिल पाती और कई बार पितृ दोष भी लगने की आशंका बढ़ जाती है.

कपड़ों का क्या करें?

मृतक के कपड़े यादों से जुड़े होते हैं, लेकिन गरुड़ पुराण के अनुसार इन्हें घर में लंबे समय तक रखना उचित नहीं माना जाता. इन्हें जरूरतमंदों को दान कर देना सबसे अच्छा उपाय है. इससे न सिर्फ आत्मा का मोह टूटता है बल्कि पुण्य भी मिलता है. दान करने से मृत आत्मा को शांति मिलती है और घर का माहौल भी सकारात्मक रहता है.

गहनों को लेकर सावधानी

मृतक के गहनों को घर में रखा जा सकता है, लेकिन उन्हें पहनने से बचना चाहिए. गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गहनों से व्यक्ति का भावनात्मक लगाव बहुत गहरा होता है. अगर उन्हें पहना जाए तो आत्मा का मोह और बढ़ सकता है. इसलिए इन्हें सुरक्षित रखें या फिर उचित समय पर परिवार की अगली पीढ़ी को सौंप दें, लेकिन रोजाना इस्तेमाल न करें.

रोजमर्रा की चीजें

चश्मा, घड़ी, कंबल, बिस्तर या अन्य डेली यूज की वस्तुएं घर में रखी जा सकती हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इन चीजों का बार-बार इस्तेमाल करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा रह सकती है और परिवार के सदस्यों का मन अशांत रह सकता है. समय के साथ इन चीजों को भी दान कर देना बेहतर होता है.

पितृ दोष से जुड़ा महत्व

अगर मृतक की चीजों को स्वार्थ या गलत भावना से रखा जाए तो पितर नाराज हो सकते हैं. पितृ दोष के कारण परिवार में तरह-तरह की परेशानियां, स्वास्थ्य समस्या या आर्थिक कठिनाई आ सकती है. इसलिए गरुड़ पुराण के अनुसार श्रद्धा और सही विधि से इन चीजों का त्याग करना चाहिए.

क्या है सही तरीका?

मृत्यु के बाद 13 दिन में ही मृतक की व्यक्तिगत चीजों को अलग कर दें.
  
अच्छी हालत वाली चीजें ब्राह्मण या गरीबों को दान करें.
  
टूटी-फूटी चीजों को नष्ट कर दें.

यह सब आस्था और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. कई परिवार इन परंपराओं का पालन करके मानसिक शांति पाते हैं. अगर आपको पितृ दोष की शंका है तो ज्योतिषी से सलाह लेकर पितृ शांति के उपाय करवाएं. मृत आत्मा को शांति मिले, इसके लिए सबसे जरूरी है सच्ची श्रद्धा और समय पर सही कृत्य करना.