Ganesh Chaturthi 2026: गणपति विसर्जन से पहले उत्तर पूजा करने के बाद मूर्ति को क्यों खिसकाया जाता है? जानिए मान्यता

गणेश उत्सव में बप्पा की स्थापना के बाद जितनी श्रद्धा से उनकी पूजा होती है, उतने ही भाव से उन्हें विदाई भी दी जाती है. विसर्जन से पहले उत्तर पूजा की जाती है और फिर गणपति की प्रतिमा को उसके स्थान से थोड़ा आगे खिसकाया जाता है.

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Reepu Kumari

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का उत्सव बप्पा के स्वागत से शुरू होता है और विसर्जन के साथ पूरा होता है. साल 2026 में 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है. हालांकि, कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन, पांच या सात दिन में भी विसर्जन करते हैं. विसर्जन से पहले होने वाली एक परंपरा अक्सर लोगों का ध्यान खींचती है.

दरअसल, विसर्जन से पहले गणपति की उत्तर पूजा की जाती है. पूजा और आरती के बाद प्रतिमा को उसके स्थापित स्थान से थोड़ा आगे खिसकाया जाता है. देखने में यह सामान्य-सी बात लग सकती है, लेकिन धार्मिक परंपरा में इसे बप्पा की विदाई से जुड़ा प्रतीकात्मक कदम माना जाता है. इसका संकेत होता है कि गणपति अब अपने आसन से प्रस्थान कर चुके हैं और विसर्जन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है.

विदाई से पहले होती है खास पूजा

उत्तर पूजा को भगवान गणेश को विदाई देने से पहले की जाने वाली पूजा माना जाता है. इसमें विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के बाद परिवार की सुख-शांति और मंगल के लिए प्रार्थना की जाती है. जिस तरह स्थापना के समय बप्पा का स्वागत किया जाता है, उसी तरह विसर्जन से पहले उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करने की परंपरा निभाई जाती है.


मूर्ति खिसकाने के पीछे क्या भाव है?

उत्तर पूजा पूरी होने के बाद गणपति की प्रतिमा को उसके स्थान से थोड़ा आगे खिसकाने का रिवाज है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह संकेत देता है कि बप्पा अपने आसन से उठकर आगे बढ़ चुके हैं. यानी यह केवल प्रतिमा की जगह बदलना नहीं, बल्कि विदाई की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद भक्त उन्हें विसर्जन स्थल की ओर ले जाते हैं.

स्थापना से विसर्जन तक जुड़ी है परंपरा

गणपति स्थापना के समय भक्त भगवान को घर या पूजा स्थल पर आमंत्रित करते हैं. कई दिनों तक पूजा, आरती और भोग के जरिए उनका सानिध्य महसूस किया जाता है. जब विसर्जन का समय आता है तो उत्तर पूजा के माध्यम से विदाई दी जाती है. मूर्ति को थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी इसी क्रम का हिस्सा मानी जाती है.

बप्पा से अगले साल फिर आने की कामना

विसर्जन के समय भक्त गणपति बप्पा से परिवार पर सुख, शांति, समृद्धि और मंगल बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं. साथ ही अगले वर्ष फिर आने की कामना भी की जाती है. इस तरह मूर्ति को थोड़ा आगे खिसकाना भक्तों के लिए सिर्फ एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बप्पा के प्रति श्रद्धा और भावनात्मक विदाई का संकेत माना जाता है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.