दिवाली पर कब करें मां लक्ष्मी की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त, सामग्री और आसान विधि

दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरा माना जाता है. इस साल दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी.

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Reepu Kumari

दिवाली का त्योहार आते ही घरों में रौनक बढ़ जाती है. कहीं सफाई चलती है तो कहीं रंगोली और दीपक लगाने की तैयारी होती है. इस दिन हर परिवार की कोशिश रहती है कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा अच्छे से की जाए. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख, शांति और खुशहाली आती है. यही वजह है कि लोग इस दिन पूजा के शुभ समय का खास ध्यान रखते हैं.

लक्ष्मी पूजन के लिए ये तीन समय हैं खास

नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का मुख्य शुभ समय शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक है. इसे वृषभ काल भी कहा जाता है. प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा. वहीं, निशिता काल रात 11:49 बजे से 12:41 बजे तक है. निशिता काल को विशेष धार्मिक पूजा के लिए शुभ माना जाता है.

पूजा से पहले इकट्ठा कर लें ये सामान

लक्ष्मी पूजन शुरू करने से पहले सभी जरूरी चीजें एक जगह रख लें. इसके लिए मां लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर जी की मूर्ति या तस्वीर, कलश, गंगाजल, नारियल, सुपारी, सिक्का और आम या अशोक के पांच पत्ते रखें. इसके अलावा रोली, चंदन, अक्षत, कलावा, लाल या पीला कपड़ा, फूल, धूप, अगरबत्ती, घी के दीपक, फल और मिठाई भी तैयार रखें.


सबसे पहले करें गणेश जी और कलश की स्थापना

पूजा की शुरुआत पूजा स्थल की सफाई से करें. इसके बाद वहां गंगाजल छिड़कें और हाथ में जल, फूल तथा अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें. एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें. कलश में जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें. उसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें. इसके बाद भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की मूर्तियां स्थापित करें.

इस आसान तरीके से करें मां लक्ष्मी की पूजा

सबसे पहले गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा और फूल चढ़ाएं. उन्हें लड्डू या मोदक का भोग लगाएं. इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें. उन्हें फूल, चंदन, कुमकुम, सिंदूर और मिठाई अर्पित करें. अगर आप व्यापार करते हैं, तो अपने बही खाते, लैपटॉप या काम से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजें भी पूजा में रख सकते हैं. अंत में मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है. अलग अलग स्थानों पर पूजा के समय में अंतर हो सकता है.