कल से शुरू होगी देवशयनी एकादशी, कहीं गलत दिन तो नहीं रख रहे व्रत? पहले जान लें सही तारीख और नियम

देवशयनी एकादशी का पर्व भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है. इस बार एकादशी तिथि 24 जुलाई की सुबह 5:42 बजे शुरू होगी.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म की प्रमुख एकादशियों में गिनी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और यहीं से चातुर्मास का शुभारंभ होता है. इस बार एकादशी तिथि के समय को लेकर कई लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए सही तिथि, पारण का समय और पूजा से जुड़े आवश्यक नियम जानना बेहद जरूरी है. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ होगी और 26 जुलाई को सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगी. हालांकि उदया तिथि के आधार पर देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को रखा जाएगा. वहीं व्रत का पारण 26 जुलाई को द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के दौरान करना श्रेष्ठ माना गया है.

व्रत की सही तारीख को लेकर दूर करें भ्रम

धार्मिक परंपरा में एकादशी व्रत उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है. इसी कारण इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई, शनिवार को किया जाएगा. तिथि 24 जुलाई से शुरू होने के बावजूद व्रत की मान्य तिथि 25 जुलाई ही मानी गई है. इसलिए श्रद्धालुओं को पंचांग के अनुसार निर्धारित दिन ही व्रत का संकल्प लेना चाहिए.

जानें पारण का शुभ समय

देवशयनी एकादशी व्रत का पारण 26 जुलाई 2026, रविवार को किया जाएगा. पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 16 मिनट से 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यता है कि द्वादशी तिथि में ही व्रत का पारण करना चाहिए. इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगी, इसलिए पारण समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए.


पूजन में इन बातों का रखें ध्यान

देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजा में पीले पुष्प, चंदन, हल्दी, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना गया है.

व्रत के दौरान इन नियमों का करें पालन

इस दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रख सकते हैं. भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए. इसके साथ ही क्रोध, अपशब्द और किसी के अपमान से बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि संयम और सदाचार के साथ किया गया व्रत अधिक फलदायी माना जाता है.

दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व

देवशयनी एकादशी पर अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, जल या धन का दान करना शुभ माना गया है. मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. इसी दिन से चातुर्मास आरंभ होने के कारण धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का महत्व भी बढ़ जाता है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.