Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी क्यों है खास? जानें धार्मिक महत्व और राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी कहानी
अजा एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है. 2026 में यह व्रत 7 सितंबर को है. भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी को पापों से मुक्ति और मानसिक शांति से जोडकर देखा जाता है.
नई दिल्ली: आज 7 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और अजा एकादशी को विशेष रूप से पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है.
अजा एकादशी के दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप, पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है.
राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है कथा
अजा एकादशी की सबसे प्रसिद्ध कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र को जीवन में बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था. उन्होंने अजा एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की भक्ति की. मान्यता है कि इसके बाद उनके जीवन के संकट दूर हुए और उन्हें अपना खोया हुआ राज्य और परिवार वापस मिला.
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पापों से मुक्ति की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में अजा एकादशी के व्रत को पिछले कर्मों और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु से अपने परिवार की सुख-शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव की प्रार्थना करते हैं. हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से इनके प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है.
कैसे रखा जाता है व्रत?
अजा एकादशी पर कई लोग अन्न का सेवन नहीं करते और फल, दूध या अन्य सात्विक चीजों से व्रत रखते हैं. भक्त भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और एकादशी की कथा सुनते या पढ़ते हैं. व्रत के नियम परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
2026 में आज ही है अजा एकादशी
पंचांग के अनुसार 2026 में अजा एकादशी 7 सितंबर को है. इस साल एकादशी तिथि शाम करीब 5 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है. व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी को स्थानीय पंचांग में दिए समय के अनुसार किया जाता है यानी अजा एकादशी सिर्फ उपवास का दिन नहीं बल्कि भगवान विष्णु की भक्ति, संयम और सत्य के रास्ते पर चलने की याद दिलाने वाला पर्व भी मानी जाती है.