...तो ये है भगवान श्रीराम का असली नाम, जानें प्रभु राम से जुड़ीं 11 रोचक बातें!

Ayodhya Ke Ram : भगवान प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो रहा है. आगामी 22 जनवरी इस मंदिर में प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी. भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ीं कई ऐसी बातें हैं, जो बहुत कम ही लोग जानते होंगे. आइए जानते हैं भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ीं 10 ऐसी बातें, जिन्हें जानकर आप भी चौंक जाएंगे. 

pexels
Mohit Tiwari

Ayodhya Ke Ram : भगवान श्रीहरि विष्णु के अवतार और रावण के संहारक मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम का मंदिर उनकी जन्मस्थली अयोध्या में बनकर तैयार हो रहा है. आगामी 22 जनवरी को मंदिर में प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है. इसको लेकर तैयारियां तेज हैं. वाल्मीकि रामायण के अलावा भी कई ऐसी रामायण हैं, जिनमें प्रभु राम के व्यक्तित्व और उनसे जुड़ीं कई बातों के बारे में बताया गया है. कुछ ऐसी बातें हैं, जिनको बहुत कम ही लोग जानते होंगे. आइए जानते हैं प्रभु राम के जीवन से जुड़ीं कुछ रोचक बातें. 

14 कालाओं से परिपूर्ण थे श्रीराम

भगवान श्रीराम 16 में से 14 कलाओं से युक्त थे. इसको चेतना का सर्वोच्च स्तर माना जाता है. इस कारण प्रभु श्रीराम को पुरुषों में सबसे उत्तम कहा गया है. 

यह है प्रभु का असली नाम

प्रभु श्रीराम का नाम राजा दशरथ ने राघव रखा था. नामकरण संस्कार के समय रघु राजवंश के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने उनका नाम राम रख दिया था. 

ये हैं भगवान श्रीराम के जीजाजी

भगवान श्रीराम के जीजाजी का नाम ऋषि श्रृंगी था. ये शांता के पति थे. प्रभु श्रीराम की बहन का नाम शांता था. ऋषि श्रृंगी को ऋष्यश्रृंग के नाम से भी जाना जाता है. ये काफी विद्वान थे और यज्ञ आदि कार्यों के ज्ञाता थे. प्रभु श्रीराम की दूसरी बहन का नाम कुकबी था.

इस आयु में हुई थी प्रभु श्रीराम की शादी

विवाह के समय प्रभु श्रीराम की आयु 15 वर्ष और माता सीता 6 साल की थीं. शादी के बाद दोनों 12 वर्षों तक अयोध्या में रहे. इसके बाद करीब 27 साल की उम्र में श्रीराम वनवास गए थे. 14 वर्ष वनवास काटने के बाद जब प्रभु श्रीराम वापस अयोध्या लौटे तो उनकी आयु 41 वर्ष और माता सीता की आयु 32 वर्ष थी.

16 गुणों से युक्त हैं प्रभु

भगवान श्रीराम 16 गुणों से युक्त थे. 

1- गुणवान (योग्य और कुशल)

2- प्रशंसक (किसी की निंदा न करने वाला, सकारात्मक)

3- धर्मज्ञ (धर्म के ज्ञाता)

4- कृतज्ञ (आभारी या फिर आभार व्यक्त करने वाले विनम्र)

5- सत्य बोलने वाले

6- दृढ़प्रतिज्ञ (अपनी प्रतिज्ञा पर अटल रहने वाले दृढ़ निश्चयी)

7- सदाचारी (अच्छे आचरण करने वाले,पुण्यात्मा)

8- रक्षक (सभी प्राणियों के रक्षक)

9- सामर्थ्यशाली ( सभी का विश्वास जीतने वाले, समर्थशाली)

10- प्रियदर्शन (सुंदर मुख वाले)

11-जितेंद्रिय (इंद्रियों को वश में रखने वाले)

12- विद्वान (बुद्धिमान और विवेकशील)

13- शांत और सहज (क्रोध पर विजय प्राप्त करने वाले)

14-कांतिमान (तेजवान चेहरे वाले, चमकदार शरीर)

15- वीर्यवान ( स्वस्थ, संयमी, हष्ट-पुष्ट)

16- वीर, साहसी (युद्ध में जिसके क्रोध से देवता भी डरें,धनर्धारि, असत्य के विरोधी)

ये था प्रभु श्रीराम के धनुष का नाम

प्रभु श्रीराम के धनुष का नाम कोदंड था. इसका अर्थ होता है बांस से निर्मित. यह एक चमत्कारी धनुष था, इसे हर कोई धारण नहीं कर सकता था. इस धनुष से छोड़ा गया बाण हमेशा लक्ष्य को भेदकर ही आता था. 

इंद्र के रथ पर किया था रावण का वध

मायावी रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम को देवराज इंद्र ने एक रथ दिया था. इसी रथ पर सवार होकर प्रभु ने रावण का वध किया था. 

भगवान विष्णु के हैं अवतार

प्रभु श्रीराम को भगवान श्रीहरि विष्णु का 7वां अवतार माना गया है. 

श्रीराम ने ली थी जलसमाधि

जब माता सीता धरती लोक में समाहित हो गई थीं, तब श्रीराम ने भी सरयू नदी में जल समाधि लेकर पृथ्वीलोक का परित्याग कर दिया था. 

विष्णुसहस्त्र नाम के बराबर है राम नाम

राम का नाम विष्णुसहस्त्रनाम के बराबर है. भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा था कि वे राम के नाम मे ही बसते हैं. 'राम' के नाम को श्रीराम तारक मंत्र कहा गया है. 

भगवान बुद्ध के पूर्वज हैं श्रीराम

भगवान श्रीराम ने इक्ष्वाकु वंश में जन्म लिया था. इस कारण भगवान राम को सूर्यवंशी भी कहा गया है. उनके पूर्वज जैन धर्म के तीर्थंकर ऋषभनाथ, निमिनाथ आदि थे. इस वंश में राजा दिलीप, भागीरथ, राजा पृथु, राजा रघु आदि हुए. राजा रघु के नाम से ही सभी रघुवंशी कहलाए. राम के बाद कुश के वंश में आगे चलकर गौतम बुद्ध हुए.

Disclaimer : यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.