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India Daily

West Bengal: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, इस्तीफा नहीं देने पर राज्यपाल ने भंग कर दी विधानसभा

पश्चिम बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इंकार करने वालीं ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. राज्यपाल आरएन रवि ने बंगाल विधानसभा भंग कर दी है. भाजपा ने चुनाव में 207 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की है.

Dhiraj Kumar Dhillon
West Bengal: ममता बनर्जी को बड़ा झटका, इस्तीफा नहीं देने पर राज्यपाल ने भंग कर दी विधानसभा
Courtesy: Social Media

हार के बाद भी इस्तीफा न देने पर अड़ीं ममता बनर्जी को गुरुवार शाम उस समय बड़ा झटका लगा जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा को भंग करने का ऐलान कर दिया. बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार हुई है. 207 सीटें जीतकर सूबे में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने जा रही है. 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी चल रही है. उम्मीद है 8 मई को बीजेपी के मुख्यमंत्री का नाम भी तय हो जाएगा. लेकिन हार के बाद भी मममा बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया. वह लगातार चुनाव में धांधली के आरोप लगा रही हैं.

15 वर्षों से सत्ता पर काबिज टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई 

4 मई को आए विधानसभा चुनाव नतीजों में पश्चिमी बंगाल में टीएमसी की करारी हार हुई थी. खुद ममता बनर्जी भी भवानीपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी के हाथों चुनाव हार गई थीं. 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज टीएमसी इस बार केवल 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि सूबे में बीजेपी को 207 सीटों के साथ बंपर जीत मिली है. हार से बौखलाई ममता बनर्जी हार के बाद भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं थीं. गुरुवार को राज्यपाल की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि 7 मई को अपना कार्यकाल पूरा होने के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग मानी जाएगी.

ममता बनर्जी ने नतीजों का साजिश करार दिया था

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने प‌श्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद मंगलवार को चुनावी नतीजों को साजिश करार देते हुए इस्तीफा देने से साफ इंकार कर दिया था. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था- “बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे जनादेश नहीं हैं. मैं इस्तीफा क्यों दूं, हम हारे नहीं हैं, जनादेश लूटा गया है. जब मैं हारी नहीं तो इस्तीफा देना का कोई सवाल भी नहीं उठता, मैं लोकभवन नहीं जाऊंगी.” देश ने पहली बार इस तरह की स्थिति देखी, जब किसी मुख्यमंत्री ने हार के बाद भी इस्तीफा देने से इंकार कर दिया हो. इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल में राजनैतिक टकराव और संवैधानिक अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी.