लगातार घट रही सफेद रंग की कारों की बिक्री, जानें क्या है वजह?
Sagar Bhardwaj
08 Jan 2024
कभी होती थी धनकुबेरों की पहली पसंद
एक जमाना था जब सफेद रंग की कार धनकुबेरों की शान का प्रतीक बन गई थी.
लगातार घट रहा क्रेज
लेकिन लगता है समय के साथ सफेद रंग की कारों को लेकर भारतीयों का आकर्षण कम होता जा रहा है.
लगातार घट रही बिक्री
जैटो डायनमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में 43.9 फीसदी लोगों ने सफेद रंग की कार खरीदी थी. वहीं 2022 में यह आंकड़ा गिरकर 42.2 फीसदी रह गया.
2023 में बिक्री सिर्फ इतनी कारें
2023 में कुल 39 फीसदी ही सफेद रंग की कारें बिकीं.
रंगीन कारों का क्रेज बढ़ा
बदले वक्त में काले, नीले, ग्रे रंग की कारें ज्यादा पसंद की जा रही हैं.
रंगीन जीवनशैली अपना रहे भारतीय
टाटा मोटर्स डिजाइन स्टूडियो के प्रमुख अजय जैन ने कहा कि नए जमाने में भारतीय ज्यादा रंगीन जीवनशैली अपना रहे हैं.
काले रंग को माना जाता था अशुभ
मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (मार्केटिंग एवं सेल्स) शशांक श्रीवास्तव कहते हैं कि पहले काले रंग को लोग अशुभ मानकर इस रंग की कार नहीं खरीदते थे लेकिन अब रंगों को लेकर लगों की सोच बदल रही है.
टैक्सी की तरह इस्तेमाल होती है सफेद कार
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के चीफ डिजाइन ऐंड क्रिएटिव ऑफिसर प्रताप बोस ने कहा कि सफेद रंग की कार आम तौर पर टैक्सी की तरह इस्तेमाल होती है...
इस वजह से बदल रहा ट्रेंड
इस वजह से भी लोग अपने स्टाइल, शान और व्यक्तित्व से मेल खाते रंगों की कार खरीदने लगे हैं.’