दिल्ली की हवा में जहर, 6 साल बाद मिली थोड़ी राहत


Reepu Kumari
07 Sep 2025

दिल्ली की हवा में जहरीला पारा सबसे ज्यादा

    अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली की हवा में पारा का स्तर 6.9 नैनोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है, जो वैश्विक औसत से करीब 13 गुना अधिक है.

अन्य शहरों की तुलना में दिल्ली आगे

    अहमदाबाद में पारा स्तर 2.1 और पुणे में 1.5 नैनोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली का स्तर सबसे ज्यादा पाया गया.

मानव गतिविधियों से बढ़ रहा प्रदूषण

    रिसर्च में पाया गया कि पारा का 72% से 92% हिस्सा कोयला जलाने, ट्रैफिक और उद्योगों जैसी मानव गतिविधियों से आता है.

सर्दियों और रात में खतरनाक स्तर

    सर्दियों और रात के समय पारा की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है. इसका कारण कोयला जलाना, पराली और स्थिर मौसम है.

स्वास्थ्य पर गंभीर असर

    लंबे समय तक पारा के संपर्क में रहने से तंत्रिका तंत्र, किडनी, पाचन तंत्र, इम्यून सिस्टम और फेफड़े बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं.

वैज्ञानिकों का बड़ा बयान

    प्रोफेसर गुफ़रान बीग ने कहा कि यदि छोटी मात्रा में भी लगातार 5-10 साल तक पारा सांस के जरिए शरीर में जाता रहे, तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

राहत की उम्मीद भी नजर आई

    वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल के वर्षों में दिल्ली की हवा में पारा के स्तर में धीरे-धीरे कमी के संकेत भी दिखाई दिए हैं.

पर्यावरण संरक्षण की जरूरत

    विशेषज्ञों का मानना है कि कोयले का प्रयोग कम करना, ट्रैफिक कंट्रोल और ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल ही इस संकट से राहत दिला सकता है.

पारा WHO की खतरनाक सूची में शामिल

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पारा को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक 10 रसायनों की सूची में रखा है.

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