माफ हो जाएंगे सारे ट्रैफिक चालान! लोक अदालत में ऐसे करें एप्लाई
नेशनल लोक अदालत
नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर को निर्धारित किया गया था लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के उस तारीख को कार्य दिवस घोषित करने के बाद इसके तारीख में बदलाव किया था. अब 10 जनवरी 2026 को रखा गया है.
महीने का दूसरा शनिवार
दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (DSLSA) के कार्यकारी अध्यक्ष के फैसले से अब महीने का दूसरा शनिवार इस खास आयोजन के लिए चुना गया है.
दिल्ली के सभी जिला कोर्ट में लगेंगी बेंच
इस लोक अदालत में दिल्ली के सभी जिला कोर्ट परिसरों में बेंच लगेंगी, जहां वाहन मालिक अपने पेंडिंग ट्रैफिक ई-चालान आसानी से सुलझा सकेंगे. लंबी अदालती प्रक्रिया से बचते हुए एक ही दिन में राहत मिलने का यह शानदार अवसर है.
स्टेप बाय स्टेप गाइड
अगर आपके वाहन पर पुराना चालान पेंडिंग है, तो हमारे द्वारा यहां बताएं गए सभी स्टेप को फॉलो करें और अपने चालान से मुक्ति पाएं.
पेंडिंग चालान जांचें
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट या परिवहन पोर्टल पर जाएं. वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर या चालान नंबर डालकर सभी अनपेड ई-चालान देखें. केवल यहां दिखने वाले चालान ही लोक अदालत में मान्य होंगे.
पात्रता चेक करें
सुनिश्चित करें कि चालान छोटे और कंपाउंडेबल अपराधों का हो. गंभीर मामले जैसे शराब पीकर ड्राइविंग या हिट-एंड-रन इसमें शामिल नहीं होंगे.
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाएं
DSLSA या ट्रैफिक पुलिस पोर्टल पर जाकर पहले से रजिस्टर करें. वाहन डिटेल्स, चालान नंबर और संपर्क जानकारी भरें. बिना रजिस्ट्रेशन के केस नहीं सुना जाएगा.
टोकन और अपॉइंटमेंट लेटर डाउनलोड करें
रजिस्ट्रेशन सफल होने पर टोकन नंबर और कन्फर्मेशन स्लिप प्रिंट करें – ये कोर्ट में एंट्री के लिए जरूरी हैं.
निर्धारित तारीख पर कोर्ट पहुंचें
10 जनवरी को अपॉइंटमेंट में बताए कोर्ट कॉम्प्लेक्स में जाएं. मूल दस्तावेज जैसे RC, ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस, PUC और चालान कॉपी साथ ले जाएं.
संशोधित जुर्माना जमा करें
समझौता होने पर उसी दिन तय राशि भरें और आधिकारिक रसीद लें. चालान सिस्टम से क्लियर हो जाएगा.
कौन से चालान होंगे योग्य?
छोटे उल्लंघन जैसे बिना हेलमेट/सीटबेल्ट ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, गलत पार्किंग, बिना PUC, ट्रैफिक सिग्नल अनदेखा करना, नंबर प्लेट की कमी या गलत चालान शामिल हैं. कुछ मामलों में बिना लाइसेंस ड्राइविंग पर भी राहत मिल सकती है. हालांकि, गंभीर अपराध, अन्य राज्यों के चालान या पहले से रेगुलर कोर्ट में पेंडिंग केस बाहर रहेंगे.