भूख हड़ताल का शरीर पर क्या पड़ता है असर?


Shanu Sharma
17 Jul 2026

भूख हड़ताल का असर कब से शुरू होता है?

    लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने पर शरीर तुरंत बदलाव शुरू कर देता है. शुरुआत में ऊर्जा का इस्तेमाल बदलता है और धीरे-धीरे इसका असर शरीर के हर अंग पर दिखने लगता है.

पहले 24 घंटे

    आखिरी बार खाना खाने के बाद शरीर लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन से ऊर्जा लेता है. इसी दौरान भूख तेज लगती है, जो घ्रेलिन हार्मोन के कारण होती है.

दूसरे और तीसरे दिन

    ग्लाइकोजन खत्म होने के बाद शरीर चर्बी को जलाकर ऊर्जा बनाने लगता है. इस दौरान भूख का एहसास कुछ कम हो सकता है, लेकिन यह शरीर के सर्वाइवल मोड में जाने का संकेत होता है.

चौथे से सातवें दिन

    शरीर कीटोसिस की स्थिति में पहुंच जाता है और ऊर्जा के लिए कीटोन्स का इस्तेमाल करता है. थकान, चक्कर आना, कमजोरी और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

आठवें से 12वें दिन

    जब चर्बी का भंडार कम होने लगता है तो शरीर मांसपेशियों को तोड़कर ऊर्जा बनाना शुरू करता है. इससे कमजोरी बढ़ती है और सोडियम तथा पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलित हो सकते हैं.

13वें से 15वें दिन

    इस चरण में दिल, दिमाग और अन्य अंगों पर दबाव बढ़ने लगता है. ब्लड प्रेशर गिर सकता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है और मानसिक भ्रम या सुस्ती महसूस हो सकती है.

15 दिन के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?

    डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक भूखे रहने पर किडनी और दिल को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है. इस स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी और समय पर इलाज बहुत जरूरी होता है.

खाना शुरू करने में भी बरतनी पड़ती है सावधानी

    लंबे अनशन के बाद अचानक सामान्य भोजन शुरू करना खतरनाक हो सकता है. इससे रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा रहता है, इसलिए भोजन हमेशा डॉक्टरों की निगरानी में ही शुरू कराया जाता है.

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