क्रिसमस के दिन क्यों लोग खाते हैं प्लम केक? जानें परंपरा के पीछे का राज


Princy Sharma
23 Dec 2024

प्लम केक

    प्लम केक की परंपरा सदियों पुरानी है और इसका जड़ें medieval इंग्लैंड से जुड़ी हुई हैं.

प्लम पॉटेज

    पहले लोग 'प्लम पोरेज' या 'प्लम पॉटेज' नामक एक डिश बनाते थे, जो असल में किसी भी प्रकार के प्लम से नहीं बनती थी.

क्रिसमस

    यह एक गाढ़ी, सूप जैसी मिश्रण होती थी जिसमें मांस, अनाज और सूखे फल (जैसे किशमिश) डाले जाते थे. यह खासतौर पर सर्दियों में, खासकर क्रिसमस के समय, खाया जाता था.

16वीं सदी में बदलाव

    16वीं सदी के दौरान इस डिश में लोग मांस की बजाय इसे मीठा बनाने के लिए आटा और सूखे फल डालने लगे. जिससे यह एक डेजर्ट बन गया. धीरे-धीरे इसमें मसाले भी डाले गए, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो गया.

विक्टोरियन युग

    यह डेजर्ट यूरोप भर में पॉपुलर होने लगा और क्रिसमस के दौरान एक खास मिठाई बन गई. विक्टोरियन युग में इस डेजर्ट में कई बदलाव हुए जिसके बाद प्लम केक आया है.

नाम

    इसे 'प्लम' केक कहा गया क्योंकि इसमें सूखे फल जैसे किशमिश और ब्लैक करंट्स डाले जाते हैं. जानकारी के लिए बता दें, इस केक में प्लम फल नहीं डाला जाता है.

स्टिर-अप संडे पर परंपरा

    इस केक से जुड़ी एक रिवाज भी हैं जिसे 'स्टिर-अप संडे' कहा जाता है. 'स्टिर-अप संडे' क्रिसमस के पहले रविवार को मनाया जाता था, जब परिवार मिलकर क्रिसमस केक बनाते थे और एक दूसरे से बारी-बारी से केक बैटर को घुमाने की परंपरा होती थी.

प्लम केक के प्रकार

    समय के साथ, अलग-अलग क्षेत्रों और संस्कृतियों ने इस केक की रेसिपी को अपनाया और इसमें अलग-अलग स्वाद और सामग्री जोड़ी. यही वजह है कि आजकल प्लम केक के कई प्रकार उपलब्ध हैं.

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