पाकिस्तान बनाने के लिए इतना बेताब क्यों थे मोहम्मद अली जिन्ना


कायद-ए-आजम

    पाकिस्तान की नींव रखने वाले मोहम्मद अली जिन्ना हैं. उन्हें पाकिस्तान का कायद-ए-आजम कहा जाता है.

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हिंदू मुस्लिम एकता की वकालत

    अपने राजनीतिक कैरियर में उन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता की वकालत की. उनकी बदौलत ही लखनऊ समझौते को आकार देने में मदद मिली.

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कब पड़ी नींव

    पाकिस्तान को मुस्लिम देश बनाने की नींव साल 1920 में पड़ गई थी जब उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस ( INC) से इस्तीफा दिया था.

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राजनैतिक स्वार्थ और अधिकारों की रक्षा

    कांग्रेस से वार्ता विफल होने के बाद जिन्ना ने मुस्लिमों के राजनैतिक स्वार्थ और अधिकारों की रक्षा के लिए अलग देश की मांग की.

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स्वयं का राज्य

    इतिहासकारों के मुताबिक, साल 1940 तक मोहम्मद अली जिन्ना का मानना था कि उपमहाद्वीप में मुस्लिम समुदाय के पास उनका स्वयं का राज्य होना चाहिए.

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हिंदू-मुस्लिम संघर्ष

    मुस्लिमों के लिए अलग स्वतंत्र राज्य की मांग पर उनका कहना था कि इससे हिंदू-मुस्लिम संघर्ष नहीं होगा और उनके अधिकारों को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा.

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लाहौर प्रस्ताव

    मुस्लिम लीग ने मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृ्त्व में लाहौर प्रस्ताव को पारित कराया. इस प्रस्ताव में मुस्लिमों के लिए अलग स्वतंत्र राज्य की मांग की गई थी.

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पाकिस्तान नाम के पर्चे

    रहमत अली चौधरी नाम के मुस्लिम राष्ट्रवादी छात्र ने साल 1933 में पाकिस्तान नाम के पर्चे छापकर बांटे थे.

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