ब्राउन मुस्लिम के बारे में आप कितना जानते हैं?
Babli Rautela
09 Feb 2026
ब्राउन मुस्लिम
ब्राउन मुस्लिम मुख्य रूप से उन मुसलमानों को कहा जाता है जिनकी त्वचा का रंग भूरा या सांवला होता है, खासकर दक्षिण एशियाई मूल के. यह शब्द रंग से ज्यादा क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है.
यह शब्द कहां से आया?
यह टर्म ज्यादातर डायस्पोरा में लोकप्रिय हुआ, जहां विदेशों में रहने वाले दक्षिण एशियाई मुसलमान अपनी पहचान को 'अरब मुसलमानों' से अलग बताने के लिए 'ब्राउन' इस्तेमाल करते हैं.
सिर्फ सांस्कृतिक पहचान
ब्राउन मुस्लिम कोई अलग इस्लामी फिर्का नहीं है. यह इस्लाम के साथ दक्षिण एशियाई परंपराओं का मिश्रण है, जहां लोग एक ही वक्त में नमाज पढ़ते हैं और बॉलीवुड गाने सुनते हैं.
दक्षिण एशिया के मुसलमानों
यह शब्द भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के करोड़ों मुसलमानों को कवर करता है, जो अरब प्रायद्वीप से बाहर इस्लाम के सबसे बड़े समुदायों में से हैं. यहां की आबादी में विविधता है, लेकिन 'ब्राउन' उन्हें एकजुट करता है.
रंग से जुड़ी पहचान का महत्व
'ब्राउन' शब्द त्वचा के रंग को संदर्भित करता है, जो अरब या गोरे मुसलमानों से अलग करता है. यह डायस्पोरा में रेसिज्म और पहचान की लड़ाई में इस्तेमाल होता है, जहां लोग खुद को 'ब्राउन' कहकर अपनी एशियाई जड़ें जाहिर करते हैं.
संस्कृति का अनोखा मिश्रण
ब्राउन मुस्लिम की जिंदगी में इस्लाम के साथ बॉलीवुड, भारतीय/पाकिस्तानी खान-पान, शादी-ब्याह की रस्में, सलवार-कमीज और उर्दू-हिंदी का गहरा मेल है. यह पहचान धर्म से ज्यादा संस्कृति पर टिकी है.
सोशल मीडिया पर पॉपुलर क्यों?
विदेशों में रहने वाले युवा इस शब्द का इस्तेमाल अपनी ड्यूल आइडेंटिटी दिखाने के लिए करते हैं – मुस्लिम भी और दक्षिण एशियाई भी. मीम्स, वीडियो और पोस्ट्स में यह ट्रेंड बन चुका है.
सरकारी या धार्मिक टर्म नहीं
यह कोई सरकारी या धार्मिक टर्म नहीं है, बल्कि एक अनौपचारिक तरीका है जो दक्षिण एशियाई मुसलमान खुद को दुनिया को समझाने के लिए अपनाते हैं. यह गर्व और एकता का प्रतीक बन गया है.
ब्राउन मुस्लिम
आज ब्राउन मुस्लिम सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की कहानी है जो इस्लाम को अपनी स्थानीय संस्कृति के साथ जीते हैं. यह दिखाता है कि मुसलमान हर रंग और संस्कृति के हो सकते हैं.