तो अब इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म होता है...अलविदा मुन्नवर राणा!
Antriksh Singh
15 Jan 2024
71 साल की उम्र में निधन
मशहूर उर्दू शायर मुन्नवर राणा का 71 साल की उम्र में निधन हो गया. वे पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे.
लोगों के दिलों में उतरे
उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पैदा हुए मुन्नवर ने कई खूबसूरत कविताएं लिखीं, उनकी कविताएं आम लोगों से जुड़ी हुई थीं.
'मां' के शायर
उनकी सबसे मशहूर कविता "मां" थी, जो एक मां की महानता को पारंपरिक गज़ल के अंदाज में बयां करती थी.
अवॉर्ड और उनका लौटाना
मुन्नवर को 2014 में "शहदबा" के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला. लेकिन देश में बढ़ती असहिष्णुता से चिंतित होकर उन्होंने एक साल बाद यह वापस लौटा दिया.
राजनीतिक तौर पर भी सक्रिय
राणा उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रमों में भी सक्रिय थे. उनकी बेटी सुमैया समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्य हैं, जिसका नेतृत्व अखिलेश यादव करते हैं.
मुनव्वर राणा की विरासत
मुनव्वर राणा ने अपने जीवन में जो भी सही समझा, उसके लिए लड़ने का साहस दिखाया. वे केवल कविताओं तक सीमित नहीं हैं.
विवादों से भी नाता रहा
उन्होंने तालिबान का समर्थन करने, 2020 में पेरिस में पैगंबर मुहम्मद पर विवाद के चलते मारे गए सैमुअल पैटी की हत्या का समर्थन करने के लिए भी कई आलोचनाओं का सामना किया.
योगी के लिए कही थी ये बात
उन्होंने साल 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ के फिर से सत्ता में आने पर प्रदेश छोड़ने की बात कही थी.
मोदी की मां के निधन पर उमड़ा जज्बात
मुनव्वर ने कहा था कि किसी की मां के निधन की खबर सुनकर ऐसा लगता है जैसे मेरी मां चली गई है. जब से पीएम की मां की खबर सुनी है तब से मेरे पास शब्द नहीं हैं.