आइस स्तूप से SECMOL तक... जानिए सोनम वांगचुक के 5 बड़े इनोवेशन
भूख हड़ताल से फिर सुर्खियों में
भूख हड़ताल के 21वें दिन सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. उनकी सेहत को लेकर चर्चा तेज है.
आंदोलन से आगे भी है पहचान
सोनम वांगचुक इंजीनियर, इनोवेटर और शिक्षा सुधारक के रूप में लंबे समय से हिमालयी क्षेत्रों के लिए काम कर रहे हैं.
SECMOL से बदली शिक्षा की सोच
1988 में सह-स्थापित SECMOL में छात्रों को किताबों के साथ व्यावहारिक शिक्षा और वास्तविक समस्याओं के समाधान पर काम कराया जाता है.
आइस स्तूप बना पानी का समाधान
आइस स्तूप तकनीक के जरिए सर्दियों में बर्फ जमा कर गर्मियों में खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया.
बिना हीटर के गर्म इमारतें
पैसिव सोलर तकनीक और स्थानीय सामग्री से ऐसी इमारतें विकसित की गईं, जो ठंड में भी गर्म रहने में मदद करती हैं.
HIAL की अनोखी पहल
हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की शुरुआत पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप उच्च शिक्षा के उद्देश्य से की गई.
ऑपरेशन न्यू होप की पहल
इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना रहा.
स्थानीय संसाधनों पर जोर
उनके अधिकांश प्रयोग कम लागत, स्थानीय संसाधनों और पर्यावरण के अनुकूल समाधानों पर आधारित हैं.
इनोवेशन से मिली अलग पहचान
आंदोलनों के साथ-साथ शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में किए गए उनके प्रयोगों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.