भारत बंद: क्या हैं ट्रेड यूनियन की डिमांड? 10 प्वाइंट्स में समझें
मजदूरों और किसानों की आवाज बुलंद
सरकार की नीतियों के खिलाफ 25 करोड़ से ज्यादा लोग भारत बंद में उतरे. मजदूरी, सरकारी नौकरी और श्रम संहिता पर विरोध दर्ज कराया.
भारत बंद में युवाओं का समर्थन
बेरोजगारी और रिटायर्ड कर्मियों की नियुक्ति के विरोध में युवा भारत बंद में शामिल हुए, सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए.
नई लेबर कोड के खिलाफ हल्ला बोल
श्रमिक यूनियनें कह रही हैं कि नया लेबर कोड कर्मचारियों को कमजोर करता है, इसीलिए उन्होंने आज भारत बंद बुलाया.
भारत बंद में गांव-शहर की एकजुटता
ग्रामीण मजदूर संगठनों ने ट्रेड यूनियनों का साथ देते हुए भारत बंद को समर्थन दिया, खासतौर पर मनरेगा की मांगों को लेकर.
बैंक, बस और स्कूलों पर दिखा असर
बंद के कारण कई जगहों पर बस सेवाएं रुकीं, कुछ स्कूलों में छुट्टियां घोषित हुईं, बैंकिंग सेवाएं भी आंशिक रूप से प्रभावित रहीं.
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
यूनियन ने श्रम मंत्री को 17 मांगों का ज्ञापन सौंपा, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ी.
छोटे व्यापारियों ने भी जताया समर्थन
छोटे दुकानदारों और व्यापारियों ने कहा कि सरकार की नीतियां सिर्फ बड़े बिज़नेस को फायदा पहुंचा रही हैं, हमें भी सुना जाए.
युवाओं का भविष्य खतरे में
ट्रेड यूनियन का आरोप है कि सरकार नौजवानों को रोजगार देने की बजाय रिटायर्ड कर्मियों को भर्ती कर रही है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट बना सबसे बड़ी चुनौती
बंद के चलते कई इलाकों में सार्वजनिक परिवहन बाधित हुआ, जिससे छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस और स्कूल पहुंचने में परेशानी हुई.
सरकार और यूनियनों के बीच टकराव बरकरार
पहले भी नवंबर 2020, मार्च 2022 और फरवरी 2024 में हुए बंदों के मुद्दे वही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकल पाया.