इतिहास का दूसरा सबसे गर्म मार्च बना 2025, यूरोप सबसे ज्यादा प्रभावित
कोपरनिकस की रिपोर्ट में खुलासा
यूरोपीय संघ की जलवायु एजेंसी कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने बताया कि मार्च 2025 रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे गर्म महीना रहा.
ग्लोबल तापमान में ऐतिहासिक उछाल
मार्च 2025 का औसत वैश्विक सतही तापमान 14.06°C रहा, जो पूर्व-औद्योगिक युग से 1.60°C ज्यादा और 1991-2020 औसत से 0.65°C अधिक था.
यूरोप में अब तक का सबसे गर्म मार्च
यूरोपीय भूमि का औसत तापमान 6.03°C रहा, जो कि 1991-2020 के मार्च औसत से 2.41°C ज्यादा है.
आर्कटिक सागर में बर्फ पिघलने का नया रिकॉर्ड
मार्च 2025 में आर्कटिक समुद्री बर्फ अपने 47 वर्षों के सबसे निम्न स्तर पर पहुंच गई, जो सामान्य से 6% कम है.
अंटार्कटिक बर्फ में भी गिरावट
अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का विस्तार औसत से 24% कम दर्ज किया गया, जो मार्च में चौथा सबसे कम स्तर है.
मौसम में अजीब बदलाव
कुछ क्षेत्रों में रिकॉर्ड बारिश हुई तो कुछ ने 47 वर्षों में सबसे सूखा मार्च देखा. सामंथा बर्गेस ने इसे 'मौसम का नया चेहरा' बताया.
ENSO न्यूट्रल स्थिति में बदलाव की संभावना
NOAA के अनुसार, अल नीनो समाप्त हो रहा है और ला नीना की शुरुआत हो सकती है, जो जलवायु में बड़े बदलाव ला सकती है.
पेरिस समझौते के लक्ष्य के बेहद करीब
कोपरनिकस के अनुसार, मौजूदा रुझान जारी रहे तो 2030 तक वैश्विक तापमान 1.5°C को पार कर सकता है.
जलवायु परिवर्तन की चेतावनी
WMO ने चेताया कि ENSO जैसी प्राकृतिक घटनाएं मानव जनित जलवायु संकट की वजह से और भी खतरनाक हो गई हैं.
1.5°C लक्ष्य के आसपास मंडराता संकट
WMO विशेषज्ञों ने कहा कि हम 1.5°C लक्ष्य को पार करने से महज 1°C दूर हैं और हालिया तेजी चिंताजनक है.