भूलने की आदत कब बन सकती है चेतावनी? जानें जरूरी संकेत
क्यों खास है 21 सितंबर?
हर साल 21 सितंबर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है. इसका मकसद अल्जाइमर और डिमेंशिया से जुड़ी जानकारी को लोगों तक पहुंचाना, बीमारी को लेकर मौजूद गलतफहमियों को कम करना और समय रहते मदद लेने के लिए जागरूक करना है.
2026 की थीम क्या है?
इस साल का कैंपेन इस विचार पर केंद्रित है कि बीमारी के बारे में जितनी जल्दी पता चलेगा, उतनी जल्दी जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं.
डिमेंशिया सिर्फ अल्जाइमर नहीं
डिमेंशिया किसी एक बीमारी का नाम नहीं है. यह ऐसी कई स्थितियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला व्यापक शब्द है, जो दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. अल्जाइमर बीमारी डिमेंशिया का सबसे आम रूप है.
दुनिया में कितने लोग प्रभावित?
WHO के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में 57 मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ जी रहे थे. हर साल करीब 10 मिलियन नए मामले सामने आते हैं.
हर भूलने की वजह अल्जाइमर नहीं
कभी-कभार चीजें भूल जाना सामान्य हो सकता है. तनाव, नींद की कमी, कुछ दवाएं और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी याददाश्त या सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं.
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
कुछ बदलाव डिमेंशिया से जुड़े संभावित चेतावनी संकेत हो सकते हैं:
1. रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली याददाश्त की समस्या
2. जाने-पहचाने काम करने में परेशानी
3. योजना बनाने या समस्या हल करने में कठिनाई
4. समय या स्थान को लेकर भ्रम
क्या अल्जाइमर से बचाव संभव है?
फिलहाल अल्जाइमर या डिमेंशिया को रोकने का कोई पक्का तरीका नहीं है. उम्र और कुछ अन्य जोखिम ऐसे हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता.
WHO ने किन बातों पर दिया जोर?
जुलाई 2026 में WHO ने संज्ञानात्मक गिरावट और डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए अपनी गाइडलाइंस अपडेट कीं. WHO के मुताबिक डिमेंशिया के करीब 45 फीसदी तक जोखिम ऐसे कारकों से जुड़ा हो सकता है जिन्हें बदला जा सकता है.