क्या लिवर डोनेट करने के बाद फिर से बन जाता है?
क्या लिवर का हिस्सा देने के बाद वह दोबारा बढ़ता है?
लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति में ट्रांसप्लांट कई मरीजों के लिए जीवन बचाने वाला उपचार हो सकता है. ऐसे में स्वस्थ व्यक्ति लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है.
लिवर में होती है खास क्षमता
स्वस्थ व्यक्ति के लिवर का एक हिस्सा ट्रांसप्लांट के लिए निकाला जा सकता है. इसके बाद शरीर में बचा हुआ लिवर अपनी कोशिकाओं की संख्या बढ़ाकर आकार और काम करने की क्षमता को जरूरत के मुताबिक बढ़ाता है.
इसे कहते हैं लिवर रीजनरेशन
लिवर का कुछ हिस्सा निकालने के बाद शरीर में बचा हुआ हिस्सा सक्रिय होकर खुद को बढ़ाने लगता है. चिकित्सा की भाषा में इस प्रक्रिया को लिवर रीजनरेशन कहा जाता है.
जीवित व्यक्ति भी कर सकता है दान
लिवर ट्रांसप्लांट के लिए मृत डोनर के अलावा जीवित स्वस्थ व्यक्ति भी अपना लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है. जब कोई जीवित व्यक्ति अपने परिजन को लिवर का हिस्सा देता है, तो इसे लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कहा जाता है.
डोनर का पूरा लिवर नहीं निकाला जाता
जीवित डोनर की सर्जरी में डॉक्टर लिवर का केवल उतना हिस्सा निकालते हैं, जितना मरीज के ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी हो. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि डोनर के शरीर में पर्याप्त लिवर बचा रहे, ताकि वह सामान्य जीवन जी सके.
क्या लिवर पहले जैसा हो जाता है?
लिवर के बारे में एक आम गलतफहमी है कि दान किया गया हिस्सा निकलने के बाद लिवर बिल्कुल उसी पुराने आकार में वापस बन जाता है. वास्तव में बचा हुआ लिवर बढ़ता है और शरीर की जरूरत के मुताबिक अपनी कार्यक्षमता विकसित करता है.
लिवर की कार्यक्षमता भी बढ़ती है
लिवर रीजनरेशन केवल आकार से जुड़ी प्रक्रिया नहीं है. शरीर में मौजूद लिवर का बचा हुआ हिस्सा अपनी काम करने की क्षमता को भी बढ़ाता है. इसका उद्देश्य शरीर की जरूरी जरूरतों को पूरा करना होता है.
सर्जरी के बाद लापरवाही न करें
लिवर दान करने के बाद डोनर के लिए नियमित चिकित्सकीय जांच और फॉलोअप महत्वपूर्ण होता है. सर्जरी के बाद शरीर की स्थिति पर नजर रखने के लिए डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए.