World Blood Donor Day पर दूर करें रक्तदान से जुड़े मिथक
रक्तदाता दिवस
हर साल 14 जून को रक्तदान के महत्व और जीवन बचाने में इसकी भूमिका को सम्मान देने के लिए विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है.
रक्तदान का महत्व
यह दिन रक्तदान करने के महत्व और मेउन मरीजों के लिए इसकी जीवन-रक्षक भूमिका को उजागर करता है जिन्हें रक्त चढ़ाने की जरूरत होती है.
रक्तदान में कई घंटे लगते हैं?
कई लोग मानते हैं कि रक्तदान में पूरा दिन खराब हो जाता है, इसलिए वे इससे बचते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है, पूरी प्रक्रिया में लगभग एक घंटा लगता है, जबकि रक्त निकालने में केवल 10 से 15 मिनट लगते हैं.
रक्तदान बहुत दर्दनाक होता है?
पहली बार रक्तदान करने वाले लोगों में यह डर सबसे ज्यादा देखा जाता है. सच यह है कि इसमें केवल हल्की सी चुभन होती है. सुई लगने के समय मामूली चुभन होती है, इसके अलावा पूरी प्रक्रिया लगभग दर्द रहित होती है.
रक्तदान से बीमारी फैलती है?
कुछ लोगों को लगता है कि रक्तदान करने से संक्रमण या गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. सच्चाई यह है कि रक्तदान में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरण एक बार उपयोग के लिए होते हैं और पूरी तरह सुरक्षित होते हैं.
रक्तदान से कमजोरी आ जाती है?
कई लोग सोचते हैं कि रक्तदान के बाद कई दिनों तक शरीर कमजोर रहता है. लेकिन ऐसा नहीं हैपर्याप्त आराम, पानी और पौष्टिक भोजन के साथ अधिकांश लोग अगले दिन सामान्य दिनचर्या में लौट आते हैं.
शाकाहारी लोग रक्तदान नहीं कर सकते?
आयरन की कमी के डर से कई शाकाहारी लोग रक्तदान करने से बचते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है, रक्तदान से पहले आयरन स्तर की जांच होती है. नियम शाकाहारी और मांसाहारी दोनों पर समान रूप से लागू होते हैं.
एक यूनिट रक्त, कई जिंदगियां
दुर्घटना पीड़ितों, कैंसर मरीजों और गंभीर रोगियों के लिए आपका रक्तदान जीवनदान बन सकता है. इसलिए डॉक्टर अपील करते हैं मिथकों से बाहर निकलकर, नियमित रक्तदान करें.