पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये काम, वरना पितृ हो जाएंगे नाराज


Km Jaya
06 Sep 2025

पितृपक्ष का महत्व

    सनातन धर्म में पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष कहा जाता है. इन 15 दिनों में पितर धरती पर आते हैं और आशीर्वाद देते हैं.

तर्पण और श्राद्ध का महत्व

    तर्पण और श्राद्ध से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

मांगलिक कार्य न करें

    पितृपक्ष में विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं.

इन खाद्य पदार्थों का सेवन न करें

    शराब, मांसाहार, बैंगन, प्याज, लहसुन, बासी भोजन, सरसों का साग और मसूर की दाल का सेवन वर्जित है.

तर्पण में तिल का प्रयोग

    तर्पण के लिए काले तिल का उपयोग शुभ माना जाता है. सफेद तिल का प्रयोग भूलकर भी न करें.

बर्तनों का चयन

    श्राद्ध भोजन लोहे और स्टील के बर्तनों में न पकाएं. पीतल या तांबे के बर्तनों का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है.

श्राद्ध का भोजन बिना चखे बनाएं

    पितरों के लिए बनाया भोजन बिना चखे और बिना पहले खाए बनाना चाहिए.

अतिथि और जीव-जंतुओं का अपमान न करें

    अगर आपके द्वार पर गाय, ब्राह्मण, कुत्ता या भिखारी आए तो उनका आदर करें, अपमान करने से पितर नाराज हो सकते हैं.

झूठ और बुरे कर्म से बचें

    इन दिनों में झूठ बोलना, अपशब्द कहना, छल करना या ब्रह्मचर्य का उल्लंघन पितरों को नाराज करता है.

तर्पण का उचित समय

    तर्पण और श्राद्ध के लिए दोपहर का समय शुभ है. ब्रह्म मुहूर्त या सुबह इसे न करें.

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