जोहो के श्रीधर वेम्बु का 'अरबों का तलाक', 15,000 करोड़ के बॉन्ड और छोड़ दिए गए बेटे की अनकही दास्तान

दुनियाभर में अपनी सादगी और ग्रामीण विकास के लिए मशहूर जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु इन दिनों एक ऐसे कानूनी भंवर में फंस गए हैं.

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Ashutosh Rai

नई दिल्लीः दुनियाभर में अपनी सादगी और ग्रामीण विकास के लिए मशहूर जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु इन दिनों एक ऐसे कानूनी भंवर में फंस गए हैं, जिसने उनकी छवि और संपत्ति दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कैलिफोर्निया की एक अदालत ने वेम्बु को अपनी अलग रह रही पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के साथ चल रहे तलाक के मामले में 1.7 बिलियन डॉलर (लगभग 15,278 करोड़ रुपये) का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है. यह आदेश कॉरपोरेट जगत के इतिहास के सबसे महंगे और विवादित तलाक की लड़ाई का संकेत दे रहा है.

तीन दशक का साथ और वॉट्सऐप पर तलाक का फरमान

आईआईटी मद्रास और प्रिंसटन से शिक्षित वेम्बु ने 1993 में प्रमिला श्रीनिवासन से शादी की थी. दोनों लगभग 30 साल तक अमेरिका में रहे, लेकिन 2019 में वेम्बु अचानक भारत लौट आए और तमिलनाडु के एक गांव से कंपनी चलाने लगे. प्रमिला का आरोप है कि वेम्बु ने उन्हें और उनके ऑटिज्म से पीड़ित 26 साल के बेटे को बेसहारा छोड़ दिया. सनसनीखेज दावा यह भी है कि वेम्बु ने नवंबर 2020 में प्रमिला को WhatsApp पर बताया कि वह तलाक चाहते हैं.

शेयरों का मायाजाल

तलाक की इस लड़ाई के केंद्र में जोहो की अरबों की संपत्ति है. प्रमिला श्रीनिवासन ने अदालत में चौंकाने वाला आरोप लगाया कि वेम्बु ने उनकी जानकारी के बिना जोहो के शेयरों और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को भारत ट्रांसफर कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि वेम्बु ने चालाकी से अपने शेयर अपनी बहन राधा और भाई शेखर के नाम कर दिए.

राधा वेम्बु के पास 47.8% हिस्सेदारी है, जबकि खुद श्रीधर के पास अब केवल 5% शेयर बचे हैं. प्रमिला का कहना है कि यह कैलिफोर्निया के सामुदायिक संपत्ति कानून का सीधा उल्लंघन है, जहां शादी के दौरान बनी संपत्ति पर दोनों का आधा हक होता है.

अदालत का अभूतपूर्व कदम और वेम्बु का बचाव

जनवरी 2025 में अमेरिकी कोर्ट ने वेम्बु को 1.7 बिलियन डॉलर का बॉन्ड जमा करने का आदेश देते हुए कहा कि यह कदम पहले कभी नहीं हुआ, लेकिन प्रमिला के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है. कोर्ट ने वेम्बु की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए. दूसरी ओर, वेम्बु और उनके वकील क्रिस्टोफर मेलचर ने इन आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है.

वकील का दावा है कि जज को गुमराह किया गया है और वेम्बु ने अपनी पत्नी को अपने 50% शेयर देने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. वेम्बु का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे और पत्नी को हमेशा आर्थिक सहायता दी है.