पहाड़ों पर लेटकर बादल देखो… और हर महीने पाओ ₹8.5 लाख! 3600 युवाओं ने किया आवेदन, चुना गया सिर्फ एक
चीन के हेनान प्रांत के लाओजुन माउंटेन में निकली एक अनोखी नौकरी ने युवाओं का ध्यान खींच लिया. ‘क्लाउड ऑब्जर्वर’ के इस पद के लिए 3600 से अधिक लोगों ने आवेदन किया, लेकिन 22 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर ली सिचेन को चुना गया.
China Dream Job: अगर आपको पहाड़, बादल और कैमरा पसंद है तो चीन से आई यह खबर आपको हैरान कर सकती है. यहां एक ऐसी नौकरी के लिए हजारों युवाओं ने आवेदन किया, जिसमें दफ्तर की कुर्सी के बजाय पहाड़ की चोटी पर काम करना है. काम सुनने में जितना आसान और खूबसूरत लगता है, असल में उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है. उम्मीदवार को बदलते मौसम के बीच बादलों को कैमरे में कैद करना और सोशल मीडिया पर लगातार कंटेंट पोस्ट करना है.
यह नौकरी चीन के हेनान प्रांत के मशहूर लाओजुन माउंटेन में शुरू की गई. पहाड़ अपनी समुद्र जैसी दिखने वाली बादलों की परतों और खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के लिए जाना जाता है. नौकरी के लिए 3600 से ज्यादा लोगों ने अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन बाजी सिर्फ 22 साल के ली सिचेन ने मारी. उन्हें एक महीने तक पहाड़ की ऊंचाई पर रहकर यह खास जिम्मेदारी निभानी है.
3600 उम्मीदवारों में सिर्फ एक का चयन
लाओजुन माउंटेन की इस नौकरी ने अपने चयन के तरीके से भी लोगों का ध्यान खींचा. रिपोर्ट के मुताबिक, 3500 से ज्यादा, जबकि कई रिपोर्टों में करीब 3600 आवेदन आने की बात कही गई है. उम्मीदवारों को चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म दोयिन पर ओरिजिनल शॉर्ट वीडियो बनाकर पोस्ट करने थे. उनके कंटेंट की क्रिएटिविटी, लोगों की प्रतिक्रिया और लोकप्रियता को चयन में अहम माना गया.
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यानी इस नौकरी के लिए पारंपरिक डिग्री या सामान्य इंटरव्यू से ज्यादा सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने की क्षमता मायने रखती थी. जिस उम्मीदवार का वीडियो दर्शकों को पसंद आया, उसके चयन की संभावना मजबूत हुई. यही वजह है कि यह नौकरी आज के डिजिटल दौर में युवाओं के बदलते करियर विकल्पों की एक दिलचस्प मिसाल बन गई है.
22 साल के ली सिचेन ने मारी बाजी
आखिरकार 22 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर ली सिचेन को इस पद के लिए चुना गया. वह दोयिन पर ‘जिओ जाओ’ नाम से कंटेंट बनाते हैं. चयन से पहले उन्होंने अपने माता-पिता के साथ रात में लाओजुन माउंटेन की चढ़ाई का वीडियो तैयार किया था. उनके वीडियो को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और उस पर बड़ी संख्या में लाइक्स आए.
ली ने 16 जुलाई से करीब 7217 फीट की ऊंचाई पर अपना काम शुरू किया. उन्हें एक महीने तक पहाड़ की चोटी पर रहकर आसपास के बादलों, मौसम और प्राकृतिक दृश्यों को रिकॉर्ड करना है. इस अनुभव में ट्रैवल, फोटोग्राफी और सोशल मीडिया कंटेंट, तीनों चीजें एक साथ जुड़ती हैं.
सुबह 4:50 बजे से शुरू होता है दिन
नाम भले ही ‘क्लाउड ऑब्जर्वर’ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दिनभर आराम से बादल देखते रहना है. ली का दिन सुबह करीब 4:50 बजे शुरू होता है. उन्हें सूर्योदय से लेकर शाम तक पहाड़ पर मौसम और बादलों की स्थिति पर नजर रखनी होती है. कैमरा उनके काम का सबसे जरूरी हिस्सा है.
उन्हें हर दिन कम से कम एक ओरिजिनल शॉर्ट वीडियो तैयार करके सोशल मीडिया पर पोस्ट करना होता है. इसके लिए सही समय, रोशनी और एंगल तलाशना पड़ता है. कई बार अच्छे दृश्य के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है. पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए शानदार तस्वीर या वीडियो हासिल करना आसान नहीं है.
बारिश, ठंड और नेटवर्क की परेशानी
पहाड़ की ऊंचाई पर रहकर काम करने की अपनी मुश्किलें हैं. मौसम कभी भी बदल सकता है और तापमान में भी उतार-चढ़ाव रहता है. इसके साथ मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी चुनौती बन सकती है. जब नौकरी का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने से जुड़ा हो, तब कमजोर नेटवर्क सीधे काम को प्रभावित कर सकता है.
इसके अलावा लगातार कई घंटे अकेले रहना और सही विजुअल का इंतजार करना भी आसान नहीं है. दूर से यह नौकरी जितनी आरामदायक नजर आती है, वास्तविकता में उतनी ही मेहनत मांगती है. यानी यहां बादलों को देखने से ज्यादा जरूरी है उनके बीच सही कंटेंट तलाशना और उसे समय पर दर्शकों तक पहुंचाना.
सिर्फ नौकरी नहीं, टूरिज्म प्रमोशन भी
इस अनोखी नौकरी का मकसद केवल किसी एक युवा को रोजगार देना नहीं माना जा रहा. लाओजुन माउंटेन अपने प्राकृतिक नजारों के कारण पहले से लोकप्रिय है और सोशल मीडिया पर इसकी मौजूदगी भी मजबूत है. ऐसे में किसी क्रिएटर को एक महीने तक वहां रखकर लगातार वीडियो बनवाने से पर्यटन स्थल को बड़ी ऑनलाइन पहुंच मिल सकती है.
इस रणनीति का फायदा यह है कि एक तरफ क्रिएटर को अनोखा काम और अनुभव मिलता है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ के बादल, सूर्योदय और प्राकृतिक दृश्य लगातार सोशल मीडिया पर नजर आते हैं. इससे ऐसे लोगों तक भी लाओजुन माउंटेन की जानकारी पहुंच सकती है, जो अभी इस जगह के बारे में नहीं जानते.
ऑस्ट्रेलिया में भी हो चुका है ऐसा प्रयोग
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनोखी नौकरियों का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है. साल 2009 में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड ने ग्रेट बैरियर रीफ के लिए ‘आइलैंड केयरटेकर’ की नौकरी निकाली थी. चुने गए व्यक्ति को खूबसूरत द्वीप पर रहकर वहां के अनुभवों को दुनिया तक पहुंचाना था. उस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा मिली थी. चीन के लाओजुन माउंटेन की ‘क्लाउड ऑब्जर्वर’ नौकरी भी कुछ हद तक इसी सोच से जुड़ी दिखाई देती है. सोशल मीडिया के दौर में किसी जगह को प्रमोट करने के लिए विज्ञापन से ज्यादा वास्तविक अनुभव और आकर्षक वीडियो लोगों का ध्यान खींच सकते हैं.
युवाओं को क्यों पसंद आ रही ऐसी नौकरी?
इस नौकरी को मिले हजारों आवेदनों के पीछे सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव भी एक बड़ी वजह है. आज कंटेंट क्रिएशन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है. युवाओं के लिए यह कमाई, पहचान और करियर का माध्यम बन चुका है. ऐसे में ऐसी नौकरी जिसमें रचनात्मकता के साथ घूमने और प्रकृति के करीब रहने का मौका मिले, स्वाभाविक रूप से आकर्षण पैदा करती है. लाओजुन माउंटेन का प्रयोग यह भी दिखाता है कि आने वाले समय में नौकरियों के तरीके बदल सकते हैं. हर काम का मतलब ऑफिस में बैठकर कंप्यूटर चलाना नहीं होगा. कुछ भूमिकाएं सोशल मीडिया, पर्यटन, फोटोग्राफी और व्यक्तिगत रचनात्मकता को एक साथ जोड़ सकती हैं. यही वजह है कि ‘क्लाउड ऑब्जर्वर’ की यह नौकरी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई.