धरती को खत्म कर देगा पर्माफ्रॉस्ट? जानें क्या चीज है ये जो इंसानों को खत्म कर सकती है
Permafrost : हम इंसान विकास की चकाचौंध के आगे प्रकृति का इतना तेजी के साथ दोहन कर रहे हैं कि हमारा जीवन कब खत्म हो जाए हमें पता ही नहीं.
Permafrost : पृथ्वी एक ऐसा ग्रह जहां इंसान निवास करते हैं. अब तक ऐसा कोई दूसरा प्लेनेट नहीं खोजा जा सका है जहां धरती जैसा वातावरण हों. पृथ्वी इस ब्रह्मांड का सबसे सुंदर ग्रह मानी जाती है. धरा ने अपने अंदर कई राज समाहित किए हुए है. हम इंसान विकास की चकाचौंध के आगे प्रकृति का इतना तेजी के साथ दोहन कर रहे हैं कि हमारा जीवन कब खत्म हो जाए हमें पता ही नहीं. पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से पृथ्वी के खत्म होने की संभावना बढ़ रही है. वैज्ञानिक इसे लेकर बहुत चिंतित हैं. आखिर ये है क्या? आज हम आपको इस लेख के जरिए बताएंगे.
पर्माफ्रॉस्ट क्या है? (What is permafrost?)
पर्माफ्रॉस्ट कुछ और नहीं बल्कि धरती का एक हिस्सा है. जमीन है. बस इस जमीन की खासियत ये है कि इसकी मिट्टी धरती में पाई जाने वाली अन्य मिट्टी से अलग है. इस प्रकार की जमीन बर्फ के कारण तैयार होती है. इस लिए हम कह सकते हैं कि बर्फ से ही इस मिट्टी का निर्माण होता है. यह मिट्टी 2 साल की शून्य से कम तापमान लगभग -32 डिग्री सेल्सियस पर जमी रहती है.
इस मिट्टी में पत्तियाँ, टूटे हुए वृक्ष आदि के बिना क्षय हुए पड़े रहते है. इसके चलते जैविक कार्बन बढ़ता है. वहीं, जब बढ़ते तापमान की वजह से पर्माफ्रॉस्ट पिघलता है तो वातावरण में कार्बन की सांद्रता बढ़ने लगती है. वायुमंडल में कार्बन की बढ़ती मात्रा हम इंसानों के लिए किसी खतरे से कम नहीं.
पर्माफ्रॉस्ट पर बसे हैं कई देश
पर्माफ्रॉस्ट की मिट्टी पर कई देश बसे हुए है. कनाडा, अलास्का, अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और चीन के कुछ हिस्से पर्माफ्रॉस्ट मिट्टी पर बसे हैं. पृथ्वी के बढ़ते तापमान की वजह से पर्माफ्रॉस्ट पिघल रहा है. पिघलने की वजह से कई बड़े खतरनाक गड्ढे भी हो रहा है. इसका उदाहरण हमें रूस में देखने को मिला है. 1940 में रूस में इसी की वजह से 0.8 वर्ग किलोमीटर की चौड़ाई का एक गहरा गड्ढा हुआ था. 2020 में रूस की राजधानी मॉस्को से करीब 3 हजार किलोमीटर उत्तर पूर्व दिशा में आर्कटिक क्षेत्र में स्थित विद्युत संयंत्र से पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने के चलते लगभग 20,000 टन तेल रिसाव (Oil Spill) हुआ था.
इसकी वजह से कार्बनिक पदार्थ विघटित होकर कार्बन को ग्रीन हाउस गैसों कार्बन-डाइऑक्साइड और मीथेन के रूप में वायुमंडल में उत्सर्जित कर देते है. जब पर्माफ्रॉस्ट की मिट्टी जमी हुई अवस्था में होती है तो कार्बन का विघटन नहीं हो पाता है.
बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं
पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना धरती के लिए बहुत ही खतरनाक है. तापमान बढ़ने से जब इसका भौगोलिक रूप बदलेगा तो इससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी. इसके पिघलने की वजह से भूस्खलन, भूकंप तथा बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आ सकती हैं. कई कारणों से वातावरण में हो रहे बदलाव की वजह से ही भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ी हैं.
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