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UPS vs OPS vs NPS; यूनिफाइड नेशनल पेंशन स्कीम, पुरानी से कैसे और कितनी अलग है?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 1 जनवरी, 2004 के बाद नौकरी में आए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) शुरू की है. ये मूल वेतन के 50% पेंशन की गारंटी देती है. कर्मचारी UPS और NPS में से कोई एक चुन सकते हैं, NPS बाजार से जुड़ा हुआ है. आइए, समझते हैं कि आखिर यूनिफाइड पेंशन स्कीम पुरानी एनपीएस और ओपीएस से कितनी और कैसे अलग है?

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India Daily Live

मोदी सरकार ने 1 जनवरी 2004 के बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) नाम की एक नई पेंशन योजना शुरू की है. 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली इस योजना में मूल वेतन के 50% के बराबर पेंशन की गारंटी है. UPS शुरू करने का फैसला कई गैर-बीजेपी राज्यों की ओर से डीए से जुड़ी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस लाने और अन्य राज्यों में कर्मचारी संगठनों की ओर से इसकी मांग के जवाब में लिया गया है.

अब कर्मचारियों के पास UPS और NPS में से किसी एक को चुनने का विकल्प है. तो UPS की तुलना NPS से कैसे की जाती है और इसकी तुलना OPS से कैसे की जाती है? आइए समझने की कोशिश करते हैं.

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की प्रमुख विशेषताएं

UPS के अंतर्गत, 25 साल की मिनिमम क्वालिफाइंग सर्विस कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले अंतिम 12 महीनों के दौरान मिलने वाले एवरेज बेसिक सैलरी के 50% के बराबर पेंशन सुनिश्चित की जाएगी.
10 से 25 साल की सर्विस पीरियड के लिए पेंशन आनुपातिक (Proportional) होगी.
किसी कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, उसके परिवार को उसकी मृत्यु से ठीक पहले कर्मचारी की पेंशन की 60% की सुनिश्चित पेंशन प्राप्त होगी.
इस स्कीम में मिनिमम 10 साल की सर्विस के बाद रिटायरमेंट पर 10 हजार रुपये हर महीने की न्यूनतम पेंशन का आश्वासन भी शामिल है.
UPS सुनिश्चित पेंशन, सुनिश्चित पारिवारिक पेंशन और सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन पर मुद्रास्फीति सूचकांक (Inflation Index) लागू करेगा.
महंगाई राहत सेवा कर्मचारियों के समान, औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) पर आधारित होगी.
इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर एकमुश्त पेमेंट होगा, जिसकी गिनती सर्विस के प्रत्येक पूर्ण छह महीने के लिए मासिक परिलब्धियों (Emoluments) (वेतन + डीए) के 1/10वें भाग के रूप में की जाएगी. ये एकमुश्त पेमेंट ग्रेच्युटी से अलग है और सुनिश्चित पेंशन राशि को प्रभावित नहीं करता है.
UPS चुनने वाले कर्मचारियों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा. उनका योगदान 10 प्रतिशत ही रहेगा, जबकि सरकार का योगदान 14 प्रतिशत से बढ़कर 18.5 प्रतिशत हो जाएगा.

नेशनल पेंशन योजना (NPS) की प्रमुख विशेषताएं

NPS और नए प्रस्तावित UPS में सरकारी योगदान, पेंशन राशि और पारिवारिक पेंशन प्रावधानों के संदर्भ में अंतर है.
ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, NPS के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारी अपने मूल वेतन का 10% योगदान करते हैं, जबकि सरकार 14% योगदान करती है.
NPS में पेंशन राशि निश्चित नहीं है क्योंकि यह बाजार की गतिविधियों से जुड़ी हुई है, जबकि UPS 1 जनवरी 2004 के बाद सेवा में शामिल होने वालों के लिए वेतन का 50% सुनिश्चित पेंशन प्रदान करता है.
NPS के अंतर्गत पारिवारिक पेंशन, पेंशन फंड में जमा धनराशि और रिटायरमेंट के समय चुनी गई वार्षिकी योजना (Annuity Plan) पर निर्भर करती है.
NPS को सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू किया गया है, सिवाय उन सशस्त्र बलों के कर्मचारियों के जो 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद केंद्र सरकार में शामिल हुए हैं. ये प्राइवेट क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध है. अधिकांश राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों ने भी अपने नए कर्मचारियों के लिए NPS को नोटिफाई किया है.

ओल्ड पेंशन योजना (OPS) की प्रमुख विशेषताएं

पुरानी यानी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के तहत रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर मासिक पेंशन दी जाती थी. ये राशि महंगाई भत्ते (DA) की दरों में वृद्धि के अनुरूप बढ़ाई जाती थी.
रिटायरमेंट के बाद, कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने के भी हकदार थे, जिसकी अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये थी.
OPS के तहत, अगर किसी रिटायर्ड कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को पेंशन लाभ मिलना जारी रहेगा. इसमें सबसे बड़ी बात ये थी कि पेंशन अंशदान के लिए कर्मचारी के वेतन से कोई कटौती नहीं की गई, जो NPS के विपरीत है.
हाल ही में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब समेत भारत के कई राज्यों ने NPS से हटकर पुरानी पेंशन योजना पर लौटने का निर्णय लिया है.