Indian Railways Safety Tips: ट्रेन में फोन चोरी या गुम हो जाए तो घबराएं नहीं, बस करें ये काम; कई लोगों को नहीं पता

अगर ट्रेन में आपका फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो परेशान होने की जरुरत नहीं. यहां बताए गए नियमों को फॉलो करें तो फोन जल्द मिल सकता है.

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Reepu Kumari

Indian Railways Safety Tips: अक्सर आपने सुना होगा ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फोन गुम हो गया या चोरों ने हाथ साफ कर लिया. इन सभी बातों को सुनकर मन में एक भय सा बैठ जाता है. इसका असर ये होता है कि जब भी हम सफर पर ट्रेन से जाते हैं तो बेचैन रहते हैं कि कहीं मेरे साथ भी वही न हो जाए. लेकिन भारतीय रेलवे यात्रियों का पूरा ख्याल रखता है. उनकी सुरक्षा ही उनकी पहली प्राथमिकता होती है. यही वजह है कि रेलवे ने पहले ही इस समस्या का समाधान निकाल रखा है. लेकिन कई लोगों को इसके बारे में कोई जानकरी नहीं है. यात्रियों को सलाह देता है कि इन परिस्थितियोंमें पैनिक होने की जगह सही कदम उठाना चाहिए. 

शिकायत दर्ज करें

फोन गुम या चोरी होने पर सबसे पहला कदम शिकायत दर्ज करवाना है. जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, कार्रवाई उतनी तेजी से शुरू हो सकेगी. रेलवे यात्रियों के लिए यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है, जिससे बिना स्टेशन गए शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

रेल मदद ऐप से भी मांगे मदद

रेलवे की ओर से यात्रियों के लिए रेल मदद ऐप उपलब्ध कराया गया है. इस ऐप के जरिए मोबाइल चोरी या गुम होने की शिकायत सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंच जाती है. इससे मामले पर तेजी से कार्रवाई शुरू हो सकती है और यात्रियों को बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते.

संचार साथी पोर्टल पर करें फोन ब्लॉक

शिकायत दर्ज करने के बाद यात्रियों को संचार साथी पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल को ब्लॉक करने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए. इससे अगर फोन किसी गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए तो उसका गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा. यह प्रक्रिया ऑनलाइन आसानी से पूरी की जा सकती है.

ये जानकारी जरुर रखें अपने पास

फोन से जुड़ी शिकायत दर्ज करते समय कुछ जरूरी जानकारियां मांगी जाती हैं;

  • इसमें मोबाइल नंबर
  • 15 अंकों का IMEI नंबर
  • फोन गुम होने की जगह
  • पुलिस शिकायत या FIR नंबर
  • पूरा पता शामिल होता है
  • सही जानकारी देने से फोन ट्रेस करने में आसानी होती है.

शिकायत के बाद ऐसे चलता है पूरा प्रोसेस

फॉर्म जमा होने के बाद यात्रियों को एक रिक्वेस्ट आईडी दी जाती है. इसकी मदद से केस की स्थिति ट्रैक की जा सकती है. शिकायत दर्ज होने के बाद फोन को ब्लॉक कर ट्रेसिंग प्रक्रिया शुरू होती है. फोन का लोकेशन मिलने पर संबंधित एजेंसी और रेलवे सुरक्षा बल की मदद से उसे वापस दिलाने की कोशिश की जाती है.