Online Fraud: त्योहारों के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग, गिफ्ट कार्ड्स और ऑफर्स का क्रेज़ बढ़ जाता है और इसी समय साइबर अपराधी भी ज़्यादा सक्रिय हो जाते हैं. फिशिंग लिंक, फर्जी निवेश योजनाएँ, ओटीपी और यूपीआई धोखाधड़ी के ज़रिए लोग अपनी मेहनत की कमाई गँवा बैठते हैं. ऐसे में सवाल उठता है क्या ऑनलाइन ठगी के बाद पैसे वापस मिल सकते हैं? जवाब है हां, लेकिन सही समय और सही कदम से.
अगर आप तुरंत रिपोर्ट करें और कानूनी प्रक्रिया का पालन करें, तो आपका खोया हुआ पैसा वापस पाना संभव है. चाहे मामला बैंक धोखाधड़ी का हो या किसी ऑनलाइन ऐप के ज़रिए ठगी का, भारत सरकार और आरबीआई ने इसके लिए कई प्रभावी कदम तय किए हैं. आइए जानते हैं, ऑनलाइन ठगी के बाद पैसे की वसूली कैसे करें और खुद को भविष्य में कैसे सुरक्षित रखें.
1. ऑनलाइन धोखाधड़ी के बाद क्या करें: तत्काल कदम
- धोखाधड़ी का पता चलते ही घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करें.
- बैंक को सूचित करें: अपने बैंक खाते या यूपीआई आईडी को तुरंत ब्लॉक करवाएं.
- 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करें.
- Cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें: लेनदेन का स्क्रीनशॉट, नंबर और बैंक डिटेल्स अपलोड करें ताकि आरोपी का खाता फ्रीज हो सके.
2. कानूनी रास्ते से करें कार्रवाई
- अगर रकम बड़ी है या बैंक से सहायता नहीं मिल रही, तो कानूनी कार्रवाई करें.
- एफआईआर दर्ज करें: साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में IPC 420, IT Act 66C/66D के तहत शिकायत दें.
- साइबर वकील की मदद लें: एक विशेषज्ञ वकील आपको तेजी से रिफंड दिलाने की प्रक्रिया में मदद करेगा और कानूनी नोटिस जारी कर सकता है.
3. बैंक और आरबीआई की मदद से वसूली
आरबीआई के नियमों के अनुसार अगर आप 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट करते हैं तो आपका शून्य दायित्व होता है, यानी पूरा पैसा वापस मिल सकता है.
- 4–7 दिनों के भीतर: आंशिक वसूली संभव है.
- 7 दिनों के बाद: बैंक की नीति पर निर्भर करेगा.
- इसलिए, 24 से 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट करना सबसे अहम है.
4. ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए रूप
- फर्जी केवाईसी अपडेट के नाम पर लिंक भेजना
- व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर निवेश घोटाले
- नौकरी या रोमांस स्कैम
- गेमिंग ऐप्स और किशोरों को निशाना बनाना
- इन नए रूपों से सावधान रहें और हर कॉल या मैसेज को जांचे बिना विश्वास न करें.
5. खुद को सुरक्षित रखने के स्मार्ट उपाय
- ओटीपी, सीवीवी या यूपीआई पिन किसी से साझा न करें.
- अज्ञात लिंक या ऐप्स से दूरी बनाए रखें.
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें.
- परिवार, खासकर बुजुर्गों और बच्चों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करें.