केंद्र सरकार अपनी महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना यानी PMMVY के माध्यम से गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है. यह योजना न केवल पोषण सुनिश्चित करती है, बल्कि बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देती है. 1 जनवरी 2017 से शुरू हुई यह योजना अब 9 वर्ष पूरे कर चुकी है और देशभर में लाखों महिलाओं के जीवन को बेहतर बना रही है.
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का मुख्य लक्ष्य गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषणयुक्त आहार के लिए वित्तीय सहायता देना है. यह योजना बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित कर लिंग अनुपात में सुधार लाने का भी प्रयास करती है.
मोदी सरकार की इस योजना के तहत पहली संतान के जन्म पर 5,000 रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में दी जाती है. 3,000 रुपये की पहली किस्त गर्भावस्था के पंजीकरण पर और दूसरी 2,000 रुपये जन्म पंजीकरण तथा शिशु के 14 सप्ताह तक के टीकाकरण पर दी जाती है. वहीं दूसरी संतान के मामले में, यदि बच्ची है तो एकमुश्त 6,000 रुपये दिए जाते हैं. यह राशि आधार लिंक्ड बैंक या डाकघर खाते में DBT से सीधे पहुंचती है. सरकार की इस योजना के पीछे का लक्ष्य जच्चा और बच्चा का स्वास्थ्य है.
पात्रता के लिए महिला की आयु कम से कम 19 वर्ष होनी चाहिए और परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होना जरूरी है. इसके अलावा मनरेगा कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, ई-श्रम कार्ड, बीपीएल कार्ड धारक या दिव्यांग महिलाएं भी इस योजना के लिए पात्र हैं. आवेदन बच्चे के जन्म के लगभग नौ महीने भीतर करना जरूरी है. इसके आप pmmvy.wcd.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. या फिर नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र पर फॉर्म 1A, 1B और 1C भी जमा कर सकते हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत से अब तक 4.78 करोड़ से अधिक महिलाओं का पंजीकरण हुआ है, जबकि 4.26 करोड़ लाभार्थियों को कुल 20,073 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है. हाल के वर्षों में 2025-26 में ही 59 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिला है. यह योजना न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि मातृत्व स्वास्थ्य, बालिकाओं की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता में बड़ा योगदान कहा जाता है.