नई दिल्ली: बाहर खाना अब सिर्फ स्वाद का मामला नहीं रहा, बल्कि जेब पर भारी पड़ने लगा है. खाने की कीमत और टैक्स के अलावा कई बार बिल में सर्विस चार्ज भी जोड़ दिया जाता है. लेकिन क्या यह सही है? यह सवाल ग्राहक के मन में तब घूमने लगता है जब उनसे जबरन एक्स्ट्रा चार्ज वसूला जाता है.
अक्सर ग्राहक इसे नियम मानकर चुपचाप भुगतान कर देते हैं. लेकिन हालिया कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि सर्विस चार्ज को लेकर आपकी सहमति सबसे अहम है और इसे जबरन वसूला नहीं जा सकता.
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने उन रेस्टोरेंट्स के खिलाफ कदम उठाया, जो ग्राहकों से बिना पूछे सर्विस चार्ज वसूल रहे थे. जांच के बाद 27 रेस्टोरेंट्स पर जुर्माना लगाया गया. कुछ मामलों में वसूली गई रकम ग्राहकों को लौटाने के निर्देश भी दिए गए. यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करती है.
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत सर्विस चार्ज को अनिवार्य बनाना अनुचित व्यापार प्रथा माना गया है. CCPA ने 4 जुलाई 2022 को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए थे. इन नियमों को 28 मार्च 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया और रेस्टोरेंट्स को पालन करने का आदेश दिया.
CCPA की गाइडलाइंस के अनुसार कोई भी होटल या रेस्टोरेंट अपने आप बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता. इसे किसी दूसरे नाम से वसूलना भी गलत है. ग्राहक की इच्छा के बिना सर्विस चार्ज नहीं लिया जा सकता और मना करने पर सेवा से इनकार भी नहीं किया जा सकता.
अगर कोई रेस्टोरेंट जबरन सर्विस चार्ज वसूलता है, तो ग्राहक शिकायत दर्ज करा सकता है. इसके लिए नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है. शिकायत के बाद मामले की जांच होती है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाती है.
CCPA की जांच में पटना का कैफे ब्लू बॉटल और मुंबई का चाइना गेट रेस्टोरेंट जैसे नाम सामने आए. इन पर जुर्माना लगाया गया और बिलिंग सिस्टम से ऑटोमेटिक सर्विस चार्ज हटाने के निर्देश दिए गए. यह कार्रवाई बाकी रेस्टोरेंट्स के लिए भी चेतावनी है.