कंटेंट क्रिएटर्स के सपोर्ट में आए IT मिनिस्टर अश्वनी वैष्णव, डिजिटल प्लेटफॉर्म से की रेवेन्यू शेयरिंग की डिमांड; डीपफेक पर क्या बोले?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल प्लेटफार्मों द्वारा कंटेंट क्रिएटर्स और पत्रकारों के साथ निष्पक्ष राजस्व साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया है. इसके साथ ही, सरकार डीपफेक और एआई-जनित सामग्री पर नियंत्रण के लिए आईटी नियमों में कड़े बदलाव करने जा रही है.

Grok
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को पत्रकारों, पारंपरिक मीडिया संस्थानों, इन्फ्लुएंसर्स और शोधकर्ताओं के साथ अपनी कमाई का एक उचित हिस्सा साझा करना चाहिए. मंत्री ने जोर देकर कहा कि जो लोग कंटेंट तैयार कर रहे हैं, चाहे वे समाचार पेशेवर हों, दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले क्रिएटर्स हों या अपनी रिसर्च साझा करने वाले प्रोफेसर, वे डिजिटल प्लेटफार्मों पर जेनरेट होने वाले राजस्व में एक निष्पक्ष हिस्सेदारी के हकदार हैं.

वैष्णव ने स्पष्ट किया कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में 'फेयर रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूशन' यानी राजस्व के उचित बंटवारे के सिद्धांत को मजबूती से स्थापित करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा- 'सोशल मीडिया प्लेटफार्म उन कंटेंट से काफी लाभ कमाते हैं जिन्हें व्यक्तियों और संगठनों द्वारा अपलोड किया जाता है. ऐसे में कंटेंट बनाने वालों को उनका सही हक मिलना ही चाहिए.' उनके अनुसार, राजस्व वितरण में निष्पक्षता सुनिश्चित करने से भारत की डिजिटल कंटेंट इकोनॉमी को नई मजबूती मिलेगी.

डीपफेक और एआई सामग्री पर सख्त पहरा 

मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार डिजिटल प्लेटफार्मों की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमों को सख्त कर रही है. इसी क्रम में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 में नए संशोधनों का प्रस्ताव दिया है. इनका मुख्य उद्देश्य डीपफेक और एआई द्वारा फैलाए जाने वाले भ्रामक प्रचार पर लगाम लगाना है.

नए नियमों से तय होगी जवाबदेही 

प्रस्तावित नियमों के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के लिए 'सिंथेटिकली जेनरेटेड कंटेंट' (एआई द्वारा निर्मित) को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा. साथ ही, ऐसी सामग्री में स्थायी 'मेटाडेटा' या पहचानकर्ता शामिल करने होंगे जिन्हें बदला या हटाया नहीं जा सकेगा. 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे बड़े प्लेटफार्मों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई सामग्री प्रमुखता से चिह्नित हो.

नियमों के अनुसार, वीडियो या फोटो के मामले में यह पहचानकर्ता विजुअल डिस्प्ले के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से को कवर करना चाहिए. वहीं, ऑडियो कंटेंट की स्थिति में, इसकी शुरुआत की 10 प्रतिशत अवधि में पहचानकर्ता का होना अनिवार्य है. यदि कोई प्लेटफार्म जानबूझकर बिना लेबल वाली एआई सामग्री को अनुमति देता है, तो इसे आईटी अधिनियम के तहत 'उचित तत्परता' बरतने में विफलता माना जाएगा.