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स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के पीछे छिपा AI टैक्स, क्या आपका अगला फोन होगा और भी महंगा?

AI का विस्तार आम आदमी के लिए महंगा पढ़ता जा रहा है. एक तरफ जॉब्स की दिक्कतों का सामने कर रहे लोग, वहीं दूसरी तरफ स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतें अब जेब भी ढीली कर रही हैं.

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Ashutosh Rai

Technology News: टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है. इसका सीधा असर अब आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ने लगा है. भारत सहित दुनियाभर के मार्केट्स में स्मार्टफोन और लैपटॉप लगातार महंगे हो रहे हैं. इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण हार्डवेयर पर लग रहे एक AI टैक्स' को माना जा रहा है, जिसकी वजह से न सिर्फ डिवाइस की कीमतें बढ़ रही हैं, बल्कि उनमें मिलने वाली RAM भी कम हो रही है.

AI डेटा सेंटर्स की भारी डिमांड से बिगड़ा सप्लाई चेन

दरअसल, OpenAI, Meta और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियां अपने विशाल AI डेटा सेंटर्स को पावर देने के लिए भारी मात्रा में मेमोरी चिप्स की खरीदारी कर रही हैं. जहां एक आम स्मार्टफोन को सुचारू रूप से चलने के लिए 8GB से 16GB कम-पावर वाली मेमोरी की जरूरत होती है. वहीं Nvidia के नए Rubin GPU जैसे हैवी AI वर्कलोड वाले सिस्टम 288GB तक की अगली पीढ़ी की हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM4) का इस्तेमाल करते हैं. डेटा सेंटर्स की इस असीमित डिमांड के कारण ग्लोबल मार्केट में स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए मेमोरी चिप्स की भारी कमी पैदा हो गई है.

कंपोनेंट की कीमतों में 300% तक का उछाल

ग्लोबल RAM मार्केट पर मुख्य रूप से Samsung, SK Hynix और Micron जैसी सिर्फ तीन कंपनियों का दबदबा है, जिनकी कुल मार्केट हिस्सेदारी लगभग 93 प्रतिशत है. इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) के वाइस प्रेसिडेंट फ्रांसिस्को जेरोनिमो के अनुसार, हाल के महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में 200 से 300 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है. चूंकि AI कंपनियां लंबी अवधि के सौदे और ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं, इसलिए चिप मेकर्स डेटा सेंटर्स को प्रायोरिटी दे रहे हैं.

Samsung को भी हो रही दिक्कत

दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Samsung के मोबाइल डिवीजन को भी अपने गैलेक्सी फोन के लिए RAM हासिल करने में कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है, क्योंकि उनका अपना सेमीकंडक्टर डिवीजन भी ज्यादा मुनाफा देने वाले डेटा सेंटर ग्राहकों को प्राथमिकता देता है।

स्मार्टफोन ब्रांड्स पर प्रभाव और बढ़ती कीमतें

मेमोरी की इस कमी का सबसे बुरा असर छोटे ब्रांड्स और मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट पर पड़ रहा है, जो पहले ही बहुत कम हार्डवेयर मार्जिन पर काम करते हैं. Apple और Samsung जैसे प्रीमियम ब्रांड्स मजबूत सप्लाई चेन और ज्यादा मार्जिन के कारण कुछ हद तक इस झटके को सह सकते हैं, लेकिन वे भी बढ़ी हुई लागत का भार उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं.

ज्यादा कीमत पर लॉन्च हुए फोन

हाल ही में Apple, Samsung और Nothing ने अपने नए डिवाइस पुरानी पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा कीमत पर लॉन्च किए हैं. इसका सबसे ताजा उदाहरण Samsung की नई Galaxy S26 सीरीज है, जिसके बेस मॉडल की शुरुआती कीमत 87,999 रुपये रखी गई है, जबकि S26 Ultra की कीमत 1,39,999 रुपये तक पहुंच गई है.