हरिद्वार में अब नहीं मिलेगी 'वेज बिरयानी', संतों की मुहिम का मुस्लिम समाज ने भी किया समर्थन, ऑर्डर करने पर मिलेगा पुलाव

हरिद्वार में वेज बिरयानी की जगह वेज पुलाव शब्द के प्रयोग को लेकर संत समाज, ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय ने संयुक्त अभियान चलाया.

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Ashutosh Rai

धर्मनगरी हरिद्वार में इन दिनों एक अनोखी सामाजिक और सांस्कृतिक मुहिम चर्चा का विषय बनी हुई है. वेज बिरयानी और वेज पुलाव को लेकर शुरू हुए इस अभियान में संत समाज, ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय एक मंच पर दिखाई दिए. अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में हरिद्वार और कनखल क्षेत्र में दुकानों, ठेलियों और रेहड़ी-पटरियों पर लगे वेज बिरयानी के पोस्टर हटाकर उनकी जगह वेज पुलाव के स्टिकर लगाए गए.

धर्मनगरी में शुरू हुआ नया अभियान

हरिद्वार और कनखल क्षेत्र में रविवार को एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें संत समाज, ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया. अभियान के दौरान विभिन्न बाजारों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास संचालित दुकानों पर लगे 'वेज बिरयानी' के पोस्टर हटाए गए और उनकी जगह वेज पुलाव लिखे स्टिकर लगाए गए. इस मुहिम का नेतृत्व श्री हिंदू तख्त के प्रधान यशदीप कौशिक ने किया. उनके साथ जूना अखाड़े के संत, सामाजिक संगठनों के सदस्य और राष्ट्रीय सूफी संत फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. अभियान का उद्देश्य किसी व्यापारी का विरोध नहीं बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता देना बताया गया.

आस्था का सवाल

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. यशदीप कौशिक ने कहा कि यहां आने वाले तीर्थयात्री धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव महसूस करते हैं. ऐसे में स्थानीय पहचान के अनुरूप शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि वेज पुलाव शब्द स्थानीय परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के अधिक निकट है. इसी सोच के साथ लोगों को स्वेच्छा से इस बदलाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है. अभियान के दौरान कई दुकानदारों ने भी सहयोग करते हुए नए स्टिकर लगाए.


मुस्लिम समुदाय की साझा पहल

इस मुहिम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें संत समाज और मुस्लिम समुदाय दोनों ने एक साथ भागीदारी की. राष्ट्रीय सूफी संत फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी नौशाद अली साबरी ने कहा कि यदि किसी शब्द से किसी समुदाय की भावनाएं प्रभावित होती हैं तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को सबसे महत्वपूर्ण बताया. वहीं जूना अखाड़े के संत एवं माया देवी मंदिर के पुजारी भास्करपुरी महाराज ने लोगों से अपील की कि वे धर्मनगरी की गरिमा को ध्यान में रखते हुए वेज पुलाव शब्द को अपनाएं. उन्होंने बताया कि हरिद्वार के अलावा ऋषिकेश में भी इसी प्रकार का अभियान चलाया गया है.

आगे और व्यापक होगा अभियान

अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यह पहल आने वाले दिनों में और व्यापक स्तर पर चलाई जाएगी. मायापुरी, हर की पौड़ी और अन्य धार्मिक क्षेत्रों में दुकानदारों को वेज पुलाव शब्द अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. भास्करपुरी महाराज ने कहा कि शब्दों का असर केवल भाषा तक सीमित नहीं रहता बल्कि वे लोगों की सोच और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित करते हैं. उनका मानना है कि इस बदलाव से धार्मिक स्थलों की पारंपरिक पहचान को और मजबूती मिलेगी.