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धामी सरकार का UCC में बड़ा बदलाव, उत्तराखंड में लिव-इन रजिस्ट्रेशन में अब आधार नहीं होगा जरूरी

उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) में बड़ा संशोधन किया है. अब लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं रहेगा. पासपोर्ट, वोटर आईडी या राशन कार्ड जैसे अन्य दस्तावेज मान्य होंगे.

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Kuldeep Sharma

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद धामी सरकार ने उसमें अहम बदलाव किए हैं. सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को लेकर आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है.

अब पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए भी रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकेगा. यह संशोधन उन लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो राज्य से बाहर या अन्य देशों से यहां रह रहे हैं और आधार कार्ड न होने के कारण रजिस्ट्रेशन में दिक्कतों का सामना कर रहे थे.

पहचान पत्र को लेकर सरकार का बड़ा बदलाव

धामी सरकार ने पहले लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया था. लेकिन अब इस नियम में राहत दी गई है. सरकार ने तय किया है कि अब आवेदक पासपोर्ट, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य वैध पहचान पत्रों के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. यह कदम उन लोगों के हित में उठाया गया है जो राज्य के बाहर से आकर यहां रह रहे हैं.


बाहरी राज्यों और देशों के लोगों को राहत

दो महीने पहले यह समस्या सामने आई थी कि नेपाल, भूटान या अन्य प्रदेशों से आकर रहने वाले लोग आधार कार्ड न होने के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पा रहे थे. इसके चलते सरकार ने प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया. अब इन लोगों को किसी प्रकार की तकनीकी दिक्कतों या दस्तावेजों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. यह बदलाव राज्य की नीति को अधिक समावेशी बनाता है.

यूसीसी में चौथा संशोधन

धामी सरकार ने यह संशोधन यूसीसी में चौथी बार किया है. इससे पहले भी कई तकनीकी और कानूनी सुधार किए जा चुके हैं. ताकि नागरिकों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सुविधा मिल सके. इस बार का संशोधन खास तौर पर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों की पहचान और पंजीकरण को सुगम बनाने पर केंद्रित है. सरकार का मानना है कि लिव-इन संबंधों की वैध पहचान से सामाजिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ेगी.

ऑनलाइन सिस्टम में भी होंगे बदलाव

राज्य सरकार के मुताबिक, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन वेबसाइट में भी कई अहम बदलाव किए जा रहे हैं ताकि आवेदन प्रक्रिया और सरल हो सके. गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि आवेदन के 30 दिनों के भीतर महा निबंधक अधिकारी सभी दस्तावेजों की जांच करेंगे और फिर रजिस्ट्रेशन प्रमाणित किया जाएगा. अब तक राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप के 60 रजिस्ट्रेशन पूरे हो चुके हैं, और नए संशोधन से यह संख्या और बढ़ने की संभावना है.

संशोधन का उद्देश्य नागरिक सुविधा

गृह सचिव शैलेश बगौली का कहना है कि समान नागरिक संहिता में किए जा रहे संशोधन नागरिकों की सुविधा और राज्य की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं. उनका मानना है कि किसी भी कानून की सफलता तभी संभव है जब वह व्यावहारिक और सभी के लिए सुलभ हो. इस संशोधन से राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नागरिकों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है.