उत्तराखंड में सफल हुआ बेटी बचाओ का नारा... बेटियों के जन्म अनुपात में बना देश का नंबर- 1 राज्य
उत्तराखंड के पहाड़ों में बटी बचाओ का नारा अब सफल होता दिख रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात साल 2020-22 के दौरान 857 था, जोकि अब बढ़कर 868 तक पहुंच गया है.
उत्तराखंड के पहाड़ों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जोकि समाज में बदलती सोच और बेटियों के प्रति बढ़ते सम्मान की नई कहानी बयां करती है. लंबे समय तक लिंगानुपात की चुनौती से जूझने वाले राज्य ने अब इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड ने जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार के मामले में देश के सभी बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है, जो सामाजिक जागरूकता और सरकारी प्रयासों की सफलता का संकेत माना जा रहा है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात साल 2020-22 के दौरान 857 था, जोकि अब बढ़कर 868 तक पहुंच गया है. यानी राज्य ने 11 अंकों का सुधार दर्ज किया है, जो देश के बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा है. इसका अर्थ है कि प्रत्येक 1000 लड़कों पर कितनी लड़कियां जन्म ले रही हैं. हालांकि लिंगानुपात को और बेहतर बनाने की जरूरत बनी हुई है, लेकिन सुधार की रफ्तार ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना दिया है.
बेटियों के प्रति बदली सामाजिक सोच
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होने का प्रमाण भी है. शिक्षा, जागरूकता और महिला सशक्तिकरण से जुड़े अभियानों ने लोगों की सोच में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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2022 के बाद दिखी सबसे बड़ी छलांग
आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2014-16 में राज्य का जन्म लिंगानुपात 850 था, जो अब 868 तक पहुंच चुका है. खास बात यह है कि 2014-16 से 2020-22 के बीच जहां केवल सात अंकों का सुधार हुआ, वहीं इसके बाद के सालों में 11 अंकों की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई. इससे स्पष्ट होता है कि हाल के सालों में जागरूकता और सरकारी प्रयासों का असर तेजी से दिखाई दिया है.
सख्ती से रुकी अवैध लिंग जांच
राज्य में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन ने भी इस सुधार में अहम योगदान दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले कई अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्यवाही की, मशीनें सील कीं और पंजीकरण रद्द किए. इससे अवैध लिंग जांच पर काफी हद तक रोक लगाने में सफलता मिली.
सरकार ने जताया संतोष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को जागरूकता अभियानों, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और ‘बेटी बचाओ’ जैसे कार्यक्रमों का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि राज्य में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच मजबूत हुई है और आने वाले समय में लिंगानुपात को और बेहतर बनाने के लिए प्रयास लगातार जारी रहेंगे.