उत्तराखंड: 1,320 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट पर छिड़ा सियासी संग्राम, पवन खेड़ा के खिलाफ बागेश्वर में पुलिस शिकायत
उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट बिजली प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया को लेकर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस के आरोपों के बाद बीजेपी नेता ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर की मांग की है.
उत्तराखंड में प्रस्तावित 1,320 मेगावाट बिजली प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं. कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए राज्य सरकार के दर्जा राज्यमंत्री भूपेश उपाध्याय ने बागेश्वर कोतवाली में कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. उपाध्याय ने पुलिस से मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
बीजेपी का आरोप: छवि धूमिल करने की साजिश
बीजेपी नेता भूपेश उपाध्याय ने अपनी शिकायत में कहा कि पवन खेड़ा ने राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार की छवि खराब करने के उद्देश्य से झूठे आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता का इतिहास रहा है कि वे पूर्व में भी अन्य राज्यों के चुनावों के दौरान निराधार आरोप लगाकर बाद में जांच में गलत साबित हुए हैं.
कांग्रेस के सवाल और टेंडर में बदलाव के आरोप
यह पूरा विवाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ. कांग्रेस का आरोप है कि सार्वजनिक क्षेत्र के UJVNL-THDC प्रोजेक्ट को रद्द कर टेंडर की शर्तों में कई बदलाव किए गए ताकि एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके. पार्टी ने 25 साल के बिजली खरीद समझौते (PPA) और उसकी दीर्घकालिक लागत को लेकर पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
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प्रतिस्पर्धी बोली और सरकार का स्पष्टीकरण
दूसरी तरफ, उत्तराखंड सरकार ने कांग्रेस के सभी आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया है. सरकार का कहना है कि बिजली की खरीद प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding) के नियमों के अनुसार की गई है, जिसमें सबसे कम बोली (L1) लगाने वाली कंपनी को अनुबंध दिया गया है. यह फैसला प्रदेश की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है.