पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ FIR नहीं चाहते CM भगवंत मान, केंद्र से की 3,000 रुपये की मांग

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पराली जलाने वाले किसानों पर FIR के बजाय आर्थिक मदद देने की बात कही है.

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Ashutosh Rai

धान की कटाई का समय नजदीक आते ही पंजाब में पराली प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि किसानों पर FIR दर्ज करना समाधान नहीं है. उनका कहना है कि पराली न जलाने के लिए किसानों को आर्थिक मदद दी जाए, ताकि उन्हें अतिरिक्त खर्च का बोझ न उठाना पड़े.

किसानों को FIR के बजाय आर्थिक मदद की मांग

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में किसान मेले के उद्घाटन के दौरान भगवंत मान ने कहा कि वह पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने केंद्र से धान उगाने वाले किसानों को पराली नहीं जलाने पर नकद प्रोत्साहन देने की मांग की. किसान संगठनों की ओर से प्रति एकड़ 3,000 रुपये सहायता की मांग पहले से उठाई जा रही है. किसानों का कहना है कि धान कटने और गेहूं बोने के बीच समय बहुत कम रहता है, इसलिए पराली हटाने पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है. मान ने कहा कि किसान खुद भी धुआं नहीं चाहते, इसका असर उनके स्वास्थ्य और खेतों पर पड़ता है.

पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर सवाल

मुख्यमंत्री ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को लेकर हर साल पंजाब के किसानों पर सवाल उठाए जाने पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि सिर्फ पंजाब के धुएं को जिम्मेदार मानना सही नहीं है और हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित दूसरे क्षेत्रों के उत्सर्जन को भी देखा जाना चाहिए. मान ने पाकिस्तान के पंजाब का जिक्र करते हुए भी हवा में प्रदूषण के दूसरे स्रोतों पर ध्यान देने की बात कही. दूसरी ओर, किसान नेताओं ने पुराने मामलों को वापस लेने की मांग रखी है. सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने सरकार से पहले दर्ज FIR वापस लेने को कहा, जबकि हरिंदर सिंह लाखोवाल ने नकद सहायता की मांग दोहराई.


पराली जलाने के मामले पहले ही हुए कम

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों में बड़ी कमी आई है. 2023 में 36,663 मामलों के मुकाबले 2025 में 5,114 घटनाएं दर्ज हुईं, यानी करीब 86 प्रतिशत की गिरावट. पराली प्रबंधन के लिए किसानों को कृषि मशीनों पर सब्सिडी भी दी जाती है. केंद्र की योजना के तहत किसानों को मशीन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक और सहकारी समितियों, किसान संगठनों व पंचायतों जैसे संस्थानों को कुछ मामलों में 80 प्रतिशत तक सहायता दी जाती है. पंजाब में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, बेलर और रेक जैसी मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है.