उत्तराखंड की ट्राउट फिश बनेगी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड, UAE भेजी जाएगी पहली खेप; जानें क्या -क्या होगें इसके फायदे
उत्तराखंड सरकार संयुक्त अरब अमीरात को ट्राउट मछली एक्सपोर्ट करने की तैयारी कर रही है. पहले फेज में 20 टन ट्राउट भेजी जाएगी. इससे मछली पालने वाले किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और रोजगार के नए मौके भी बनेंगे.
देहरादून: ट्राउट मछली की प्रजाति जो उत्तराखंड के सेंट्रल हिमालयी राज्य की ठंडी और साफ-सुथरी धाराओं में पनपती है, अब इंटरनेशनल मार्केट में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है. इस संबंध में मत्स्य विभाग ने संयुक्त अरब अमीरात को ट्राउट मछली के एक्सपोर्ट के लिए फूड सेफ्टी और अन्य जरूरी सर्टिफिकेट हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
पहले चरण में 20 टन ट्राउट मछली एक्सपोर्ट करने की योजना है. यह मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी. यह सरकारी पहल न केवल मछली पालने वाले किसानों को बेहतर दाम देगी, बल्कि उन्हें ट्राउट मछली पालन को और बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी.
क्या है इसका मकसद?
मछली पालन को रोजगार का एक बड़ा जरिया बनाने के मकसद से राज्य सरकार ट्राउट मछली उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. फिलहाल मछली पालक किसान पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी जिलों के पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ देहरादून में भी रेसवे यानी बहते साफ पानी वाले तालाब में ट्राउट मछली का उत्पादन कर रहे हैं.
क्यों बढ़ रही इसकी मांग?
चंपावत, नैनीताल और अन्य पहाड़ी इलाकों में भी इसे शुरू किया जा रहा है. फिलहाल राज्य में 1625 रेसवे में 710 मीट्रिक टन ट्राउट मछली का उत्पादन हो रहा है. धाराओं के साफ पानी में पाले जाने के कारण, इस क्षेत्र की ट्राउट मछली का स्वाद बहुत अच्छा माना जाता है. ही वजह है कि इसकी मांग भी बढ़ रही है.
हाल ही में, मत्स्य विभाग ने दुबई में गल्फूड में राज्य में उत्पादित ट्राउट मछली का प्रदर्शन किया. मत्स्य विभाग के निदेशक अनिल कुमार के अनुसार गल्फूड में लोगों ने उत्तराखंड की ट्राउट मछली की बहुत तारीफ की. संयुक्त अरब अमीरात के कई डिस्ट्रीब्यूटरों ने विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया है और उनसे वहां ट्राउट की सप्लाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. इसी को देखते हुए अब राज्य से यूएई को ट्राउट एक्सपोर्ट करने की तैयारी चल रही है.
कैसे होगा सप्लाई?
मत्स्य विभाग ने ट्राउट की मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया है. फिलहाल, ट्राउट मछली पालने वाले किसानों की विभिन्न समितियों के ज़रिए ITBP यानी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को सप्लाई की जा रही है. ITBP को लगभग 32 टन मछली पहले ही सप्लाई की जा चुकी है. अब SSB यानी सशस्त्र सीमा बल और सेना के साथ भी समझौते तैयार किए जा रहे हैं. इसके अलावा ट्राउट की सप्लाई स्टार होटलों को भी की जा रही है.
राज्य में उत्पादित ट्राउट के एक्सपोर्ट के लिए, फूड सेफ्टी और अन्य सर्टिफिकेशन जरूरी हैं. इन सर्टिफिकेट को जल्द से जल्द हासिल करने की कोशिश की जा रही है ताकि ट्राउट की पहली खेप यूनाइटेड अरब अमीरात भेजी जा सके. इसके बाद दूसरे देशों में भी एक्सपोर्ट किया जाएगा.
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