विवाह के समय गलत जानकारी दी तो...उत्तराखंड में UCC संशोधन बिल लागू, जानें क्या हुए बड़े बदलाव

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मकसद UCC को और ज्यादा प्रभावी, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाना है. साथ ही प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान करना और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है.

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Sagar Bhardwaj

देहरादून: उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए सरकार ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू कर दिया है. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की स्वीकृति के बाद यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत जारी किया गया और तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

क्यों जरूरी था संशोधन

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मकसद UCC को और ज्यादा प्रभावी, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाना है. साथ ही प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान करना और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है.

कानूनी ढांचे में बड़ा बदलाव

अध्यादेश के तहत अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 लागू की गई है. वहीं दंड से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों को अपनाया गया है, जिससे कानून को नए सिस्टम के अनुरूप किया गया है.

प्रशासनिक प्रक्रिया में सुधार

संशोधन के अनुसार अब धारा 12 के अंतर्गत “सचिव” की जगह “अपर सचिव” को सक्षम अधिकारी बनाया गया है. यदि उप-पंजीयक तय समय में कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला अपने आप पंजीयक और पंजीयक जनरल को भेज दिया जाएगा.

दंड और अपील का प्रावधान

अब उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील की सुविधा दी गई है. साथ ही दंड की वसूली भू-राजस्व की तरह की जा सकेगी, जिससे नियमों के पालन में सख्ती आएगी.

विवाह और लिव-इन संबंधों पर सख्त नियम

विवाह के समय पहचान से जुड़ी गलत जानकारी को अब विवाह निरस्तीकरण का आधार माना जाएगा. इसके अलावा विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या गैरकानूनी कृत्यों पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. लिव-इन संबंध समाप्त होने पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा.

भाषा और अधिकारों में बदलाव

अनुसूची-2 में “विधवा” शब्द की जगह अब “जीवनसाथी” शब्द इस्तेमाल होगा. साथ ही विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने का अधिकार पंजीयक जनरल को दिया गया है.

सरकार का उद्देश्य

सरकार के अनुसार यह संशोधन नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा, कानूनी स्पष्टता और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में एक अहम कदम है.