शिक्षा में AI को लेकर राज्यपाल का बड़ा संदेश, कोर विवि रुड़की ने पेश किया भविष्य का रोडमैप

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आधुनिक तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

ANI
Reepu Kumari

देहरादून: उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने सोमवार को शिक्षा व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), आधुनिक तकनीक और कौशल विकास की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों से भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने पर जोर दिया. लोक भवन में आयोजित बैठक के दौरान कोर विश्वविद्यालय रुड़की की ओर से एआई आधारित पहलों और आगामी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया.

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से शिक्षा और तकनीक को जोड़ने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की गई. राज्यपाल ने कहा कि बदलते समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है. विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता, नवाचार और अनुसंधान से जोड़ना उच्च शिक्षण संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.

कोर विश्वविद्यालय ने साझा किया AI आधारित विजन

लोक भवन में आयोजित बैठक में कोर विश्वविद्यालय रुड़की की कुलपति प्रो. अनुभा सिंह ने विश्वविद्यालय की एआई एवं आधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़ी पहलों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया. उन्होंने संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी राज्यपाल को दी. इस दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. राजेश कुमार भी मौजूद रहे.


भविष्य के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे प्रयास करने चाहिए, जिनसे विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक कौशल विकसित हो. उन्होंने शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे युवा बदलती वैश्विक चुनौतियों का बेहतर सामना कर सकेंगे.

संस्कृत और तकनीक के समन्वय पर भी हुई चर्चा

सोमवार को राज्यपाल से महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो. शिव शंकर मिश्रा ने भी मुलाकात की. इस दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार से जुड़े विषयों पर विचार विमर्श हुआ. बैठक में प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया.

संस्कृत को वैश्विक पहचान दिलाने की जरूरत

राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान परंपरा की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के लिए आधुनिक माध्यमों का उपयोग जरूरी है, जिससे इसकी वैज्ञानिकता और समृद्ध विरासत को व्यापक स्तर पर पहचान मिल सके.

AI और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ेगी शिक्षा

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक का युग है. ऐसे में शिक्षा, शोध और ज्ञान के प्रसार को नई तकनीकों से जोड़ना आवश्यक है. उन्होंने इस दिशा में विश्वविद्यालयों की सक्रिय भूमिका पर बल देते हुए कहा कि तकनीक और शिक्षा का समन्वय भविष्य की मजबूत नींव तैयार करेगा.