भाइयों संग खेतों में खेला क्रिकेट, पड़ोसियों की डांट भी सुनी; अब टीम इंडिया तक पहुंचीं उत्तराखंड की प्रेमा रावत
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम तक पहुंचीं प्रेमा रावत आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. भाइयों के साथ खेलकर क्रिकेट सीखने वाली प्रेमा ने अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है.
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के सुमटी बैसानी गांव की रहने वाली प्रेमा रावत आज भारतीय महिला क्रिकेट की नई पहचान बन चुकी हैं. कभी पहाड़ों के बीच खेतों और घर के आंगन में क्रिकेट खेलने वाली यह लड़की अब देश का प्रतिनिधित्व कर रही है. उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों और गांवों से बड़े सपने देखती हैं. प्रेमा रावत की क्रिकेट यात्रा किसी बड़े शहर या आधुनिक अकादमी से शुरू नहीं हुई थी. बचपन में वह अपने भाइयों के साथ गांव में क्रिकेट खेला करती थीं. कई बार खेलते समय गेंद पड़ोसियों के खेतों में चली जाती थी और डांट भी सुननी पड़ती थी. लेकिन इन छोटी छोटी परेशानियों ने उनके सपनों की राह नहीं रोकी. क्रिकेट के प्रति उनका प्यार और जुनून लगातार बढ़ता गया.
परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
जब समाज में लड़कियों के खेलों को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं थी, तब प्रेमा के परिवार ने उनका पूरा साथ दिया. उनके पिता केदार सिंह रावत भारतीय वायु सेना में कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां बसंती देवी गृहिणी हैं. परिवार ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहयोग दिया. यही समर्थन उनके करियर की मजबूत नींव बना.
उत्तराखंड टीम में चयन से मिली पहचान
लगातार मेहनत और शानदार प्रदर्शन का नतीजा यह रहा कि वर्ष 2021 में प्रेमा रावत का चयन उत्तराखंड महिला क्रिकेट टीम में हो गया. यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खास थी क्योंकि वह बागेश्वर जिले की उन चुनिंदा महिला खिलाड़ियों में शामिल रहीं जिन्होंने राज्य स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई. राज्य टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने कई अहम मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया. प्रेमा रावत की सबसे बड़ी ताकत उनकी लेग स्पिन गेंदबाजी रही है. घरेलू क्रिकेट में उन्होंने अपनी सटीक गेंदबाजी से बल्लेबाजों को काफी परेशान किया. सीनियर महिला टी20 प्रतियोगिताओं में उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण विकेट लेकर अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
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घरेलू क्रिकेट से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के कारण चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी. राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उत्तराखंड प्रीमियर लीग समेत कई प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती.
प्रेमा के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें महिला प्रीमियर लीग में खेलने का मौका मिला. देश और दुनिया की दिग्गज खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा. इसके बाद इंडिया ए टीम में चयन ने उनके करियर को नई दिशा दी. यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते हुए अपना दमखम दिखाया और टीम इंडिया के दरवाजे उनके लिए खुल गए.