स्वामी विवेकानंद के 133वें दिग्विजय दिवस पर CM धामी ने किया नमन, युवाओं को याद दिलाया उनका संदेश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वामी विवेकानंद को उनके 133वें दिग्विजय दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में विवेकानंद के प्रभावशाली संबोधन ने दुनिया को मानव कल्याण की परंपरा से परिचित कराया.
देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वामी विवेकानंद को उनके 133वें दिग्विजय दिवस पर नमन किया. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्वामी विवेकानंद के योगदान को याद करते हुए उन्हें भारत की आध्यात्मिक चेतना का विश्वदूत और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया. धामी ने कहा कि विवेकानंद का जीवन और उनके विचार आज भी भारतीयों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं.
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में 1893 के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वहां स्वामी विवेकानंद के ओजस्वी संबोधन ने दुनिया को भारत की सनातन संस्कृति की उदारता, सहिष्णुता और मानव कल्याण की महान परंपरा से परिचित कराया. उनके विचारों ने भारतीय आध्यात्मिक चिंतन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई और मानवता को एकता, बंधुत्व तथा सद्भाव का संदेश दिया.
आध्यात्मिक चेतना के विश्वदूत को नमन
मुख्यमंत्री धामी ने स्वामी विवेकानंद को युगद्रष्टा बताते हुए उनके योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि विवेकानंद ने भारत की आध्यात्मिक सोच को दुनिया के सामने प्रभावी तरीके से रखा. उनके विचारों में मानव कल्याण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव दिखाई देता है. यही वजह है कि उनका संदेश आज भी लोगों के बीच प्रासंगिक बना हुआ है.
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शिकागो का वह संबोधन आज भी यादगार
वर्ष 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन स्वामी विवेकानंद के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा. मुख्यमंत्री के अनुसार, उनके संबोधन ने दुनिया को भारतीय संस्कृति की उदार सोच और सहिष्णु परंपरा से रूबरू कराया. इस मंच से भारतीय आध्यात्मिक चिंतन को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिली और भारत की विचार परंपरा की व्यापक पहचान बनी.
युवाओं के लिए क्यों खास हैं विवेकानंद
धामी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन विशेष रूप से युवा शक्ति को प्रेरणा देता है. उनके विचार आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देते हैं. मुख्यमंत्री ने माना कि आज भी उनके विचार युवाओं को राष्ट्रसेवा और मानव कल्याण की दिशा में काम करने के लिए लगातार प्रेरित कर सकते हैं.
एकता और बंधुत्व का दिया संदेश
स्वामी विवेकानंद के विचारों में मानवता के बीच एकता, बंधुत्व और सद्भाव की भावना प्रमुख रही. मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में इसी पहलू को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि विवेकानंद की सोच केवल आध्यात्मिक चिंतन तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें समस्त मानवता के कल्याण की भावना भी शामिल थी.
विचारों की विरासत आज भी कायम
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनकी विचारधारा आज भी प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करती है. खासकर युवाओं के लिए उनका संदेश आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा और मानव कल्याण से जुड़ा है. धामी ने उनके 133वें दिग्विजय दिवस पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके विचारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.