आपदा में देवदूत बना ‘उड़न खटोला’, रवि टम्टा ने अल्मोड़ा में राहत-बचाव के लिए बढ़ाया हाथ

अल्मोड़ा में भारी बारिश से पैदा हुए हालात के बीच हैपीडा स्काईनेक्स के संस्थापक रवि टम्टा ने अपने उड़ने वाले वाहन से आपदा राहत और बचाव कार्य में सहयोग की पेशकश की है.

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Kuldeep Sharma

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में आपदा के दौरान राहत पहुंचाना अक्सर बड़ी चुनौती बन जाता है. सड़कें बंद होने और दुर्गम रास्तों के कारण कई जगह मदद देर से पहुंचती है. ऐसे समय में अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने अपनी उड़ने वाली तकनीक का इस्तेमाल जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए करने की पहल की है.

आपदा प्रभावित इलाकों में मदद की पेशकश

अल्मोड़ा में लगातार बारिश के चलते पैदा हुए आपदा जैसे हालात के बीच रवि टम्टा ने स्थानीय लोगों की सहायता के लिए अपने स्तर से सहयोग की बात कही है. हैपीडा स्काईनेक्स के संस्थापक टम्टा उड़ने वाले वाहन का प्रोटोटाइप तैयार कर चुके हैं. उनका कहना है कि यह तकनीक केवल प्रयोग या प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर पहाड़ों में राहत कार्य का हिस्सा भी बन सकती है. उनकी टीम उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास करेगी.

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने पर जोर

टम्टा के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा के बाद सबसे बड़ी समस्या प्रभावित स्थानों तक जल्दी पहुंचने की होती है. भूस्खलन के कारण सड़कें बंद हो जाएं या किसी गांव का संपर्क टूट जाए, तो राहत दलों के सामने अतिरिक्त मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं. ऐसी परिस्थितियों में उड़ने वाला वाहन उन इलाकों तक पहुंच बनाने का विकल्प दे सकता है, जहां सामान्य माध्यमों से पहुंचना आसान नहीं होता. हालांकि इसका इस्तेमाल उपलब्ध परिस्थितियों और संसाधनों के आधार पर किया जाएगा.


मेडिकल इमरजेंसी में समय सबसे अहम

रवि टम्टा ने कहा कि आपदा के दौरान हर मिनट महत्वपूर्ण होता है. किसी घायल व्यक्ति को समय पर सहायता मिलना कई बार उसकी जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है. इसी सोच के साथ उन्होंने रेस्क्यू, राहत और मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में अपनी टीम के सहयोग की पेशकश की है. उनका उद्देश्य तकनीक के जरिए जरूरतमंदों तक तेजी से पहुंच बनाना और कठिन परिस्थितियों में मानवीय सहायता उपलब्ध कराने में योगदान देना है.

तकनीक को सेवा से जोड़ने की कोशिश

रवि टम्टा की पहल पहाड़ी क्षेत्रों में विकसित हो रही नई तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल की दिशा में एक प्रयास है. उनका मानना है कि किसी तकनीक की वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आती है, जब वह लोगों की मुश्किल घड़ी में काम आए. उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता की जरूरत पड़ने पर उनसे संपर्क करने की अपील भी की है. उनकी यह पहल तकनीकी प्रयोग को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है.