Rajaji Tiger Reserve में बढ़ेगी बाघों की संख्या, कॉर्बेट से लाए जाएंगे पांच और बाघ
राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच और बाघ लाने की योजना बनाई गई है. एनटीसीए की मंजूरी मिलने के बाद बाघों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी.
उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में जल्द ही बाघों की दहाड़ और अधिक सुनाई दे सकती है. वन विभाग ने रिजर्व के पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच और बाघ लाने की तैयारी शुरू कर दी है. इस संबंध में वन मुख्यालय की ओर से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है. मंजूरी मिलने के बाद बाघों के चयन और स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
राजाजी के पश्चिमी हिस्से में बढ़ाई जाएगी बाघों की संख्या
राजाजी टाइगर रिजर्व करीब 1075 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. यह क्षेत्र गंगा नदी के कारण पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बंटा हुआ है. पूर्वी हिस्से में चीला और गौहरी रेंज आती हैं, जहां पहले से 50 से अधिक बाघ मौजूद हैं. वहीं पश्चिमी हिस्से में मोतीचूर, कांसरो, रामगढ़, धौलखंड, आशारोड़ी, रानीपुर और मोहंड रेंज शामिल हैं. बेहतर जंगल और पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद इस क्षेत्र में बाघों की संख्या बेहद कम है. इसी वजह से वन विभाग यहां बाघों की आबादी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है.
प्राकृतिक और मानवीय बाधाएं बनी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वी हिस्से के बाघ गंगा नदी और चीला नहर को पार करने का जोखिम नहीं उठाते. इसके अलावा रिजर्व क्षेत्र से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन भी गुजरती है. कई स्थानों पर मानव बस्तियां भी मौजूद हैं. इन कारणों से बाघों का प्राकृतिक रूप से पश्चिमी हिस्से तक पहुंचना आसान नहीं है.
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पहले भी लाए जा चुके हैं पांच बाघ
राजाजी के पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए दिसंबर 2024 से मई 2025 के बीच कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच बाघ लाए गए थे. इनमें तीन मादा और दो नर बाघ शामिल थे. इनमें से एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म भी दिया था, हालांकि दुर्भाग्यवश वे जीवित नहीं रह सके. हाल ही में हुई कार्बेट फाउंडेशन की बैठक में तीन मादा और दो नर बाघों को राजाजी भेजने पर सहमति बनी थी. अब वन विभाग को एनटीसीए की मंजूरी का इंतजार है. मंजूरी मिलने के बाद पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी.
वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी हिस्से में बाघों की संख्या बढ़ने से न केवल जैव विविधता को मजबूती मिलेगी बल्कि पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन भी बेहतर होगा. साथ ही यह कदम उत्तराखंड में बाघ संरक्षण अभियान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. आने वाले समय में यह क्षेत्र भी देश के प्रमुख बाघ आवासों में शामिल हो सकता है.