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'लगा जैसे नीम करोली बाबा ने खुद स्वागत किया', अमेरिका से कैंची धाम पहुंचे मैक्स बोले- मेरी जिंदगी बदल गई

कैंची धाम के स्थापना दिवस पर अमेरिका से पहुंचे मैक्स विलियम्स ने बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की.

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Ashutosh Rai

कैंची धाम के स्थापना दिवस समारोह में इस बार देश के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. इनमें अमेरिका के मैक्स विलियम्स की कहानी लोगों का ध्यान खींच रही है. वर्षों की प्रतीक्षा और आध्यात्मिक खोज के बाद वह पहली बार बाबा नीब करौरी महाराज के धाम पहुंचे.

आध्यात्मिक खोज ने बदली जीवन की दिशा

अमेरिका निवासी मैक्स विलियम्स ने बताया कि कुछ साल पहले तक वह ईसाई धर्म का पालन करते थे लेकिन उनके मन में जीवन और आध्यात्मिकता को लेकर कई सवाल थे. वर्ष 2020 में एक मित्र ने उन्हें आध्यात्मिक गुरु रामदास के विचारों से परिचित कराया. वहीं से उनकी रुचि बाबा नीब करौरी महाराज की शिक्षाओं की ओर बढ़ी. उन्होंने बाबा से जुड़ी कई पुस्तकों का अध्ययन किया और उनके जीवन के बारे में गहराई से जानना शुरू किया. मैक्स का कहना है कि बाबा के विचारों ने उन्हें जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी और धीरे-धीरे उनकी सोच पूरी तरह बदल गई.

आश्रम सेवा से मजबूत हुआ जुड़ाव

मैक्स की आध्यात्मिक यात्रा उन्हें अमेरिका के न्यू मैक्सिको स्थित ताओस आश्रम तक ले गई. वर्ष 2022 में उन्होंने वहां सेवा कार्य शुरू किया और करीब दो वर्षों तक आश्रम में रहकर सेवा करते रहे. इस दौरान उन्होंने बाबा की शिक्षाओं, सेवा भावना और मानवता के संदेश को करीब से समझा. मैक्स ने बताया कि आश्रम में बिताया गया समय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर रहा. वहीं उन्होंने यह निर्णय लिया कि वह अपना जीवन मानव सेवा और बाबा के संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित करेंगे. उनका कहना है कि इस अनुभव ने उनके जीवन की दिशा बदल दी.


कैंची धाम पहुंचकर भावुक हुए मैक्स

कैंची धाम पहुंचने के बाद मैक्स काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनके लिए केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा अनुभव है. यात्रा के लिए अन्य भक्तों ने आर्थिक सहयोग भी किया. मैक्स ने बताया कि मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही उन्हें गहरी शांति का अनुभव हुआ. उनके अनुसार ऐसा लगा जैसे बाबा नीब करौरी महाराज स्वयं उन्हें अपने पास बुला रहे हों. उन्होंने कहा कि कैंची धाम में आकर उन्हें घर लौटने जैसा एहसास हुआ और यह अनुभव जीवनभर उनके साथ रहेगा.