'आज अंडा मिलेगा...', उत्तराखंड मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना का लाभ; आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की पढ़ाई के साथ सेहत का भी रखा जा रहा ध्यान
उत्तराखंड सरकार ने बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए ‘मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना’ को और मजबूती दी है. आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को सप्ताह में दो दिन अंडा और दो दिन केले के चिप्स दिए जा रहे हैं.
उत्तराखंड के दूर-दराज गांवों में मांओं के चेहरे अब थोड़े चमकदार नजर आ रहे हैं. छोटे-छोटे बच्चे आंगनवाड़ी जाते समय खुशी-खुशी पूछते हैं, आज अंडा मिलेगा या केला? मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना ने माता-पिता की चिंता को कुछ हद तक कम किया है. सरकार की इस पहल से 3 से 6 साल के बच्चों को नियमित पोषण मिल रहा है. महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाई जा रही योजना बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर जोर दे रही है.
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की पहल
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है, यही सोचकर उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना शुरू की. आंगनवाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को सप्ताह में दो बार अंडा और दो बार केले के चिप्स दिए जाते हैं. इससे बच्चों में ऊर्जा बनी रहती है और उनकी पढ़ाई व खेल दोनों में रुचि बढ़ती है.
योजना का तरीका और विकल्प
बुधवार और शनिवार को अंडा तथा सोमवार-मंगलवार को केले के चिप्स दिए जाते हैं. जो बच्चे अंडा नहीं खाते, उन्हें केला या 5 रुपये से सस्ता मौसमी फल उपलब्ध कराया जाता है. स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ही अंडा और चिप्स की गुणवत्ता की निगरानी करती हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ रहा है.
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किन बच्चों को मिलेगा लाभ
योजना का लाभ केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ही मिलेगा, जिनका आंगनवाड़ी केंद्र में पंजीकरण हो. बच्चे को केंद्र पर नियमित रूप से उपस्थित होना जरूरी है. माता-पिता को आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और स्थायी निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जमा करने होते हैं.
बजट और सरकार की प्रतिबद्धता
वर्ष 2024-25 के बजट में सरकार ने इस योजना के लिए 28.47 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है. अधिकारी लगातार आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर गुणवत्ता सुनिश्चित कर रहे हैं. इस योजना की शुरुआत साल 2022 में की गई थी.
मां-बाप को राहत और उम्मीद
गांव की मांएं बताती हैं कि पहले पौष्टिक आहार देना मुश्किल होता था, लेकिन अब आंगनवाड़ी से नियमित अंडा और चिप्स मिलने से बच्चों का वजन बढ़ रहा है और वे ज्यादा सक्रिय हो गए हैं. योजना न सिर्फ बच्चों का पोषण कर रही है बल्कि परिवारों में सकारात्मक बदलाव भी ला रही है.
आगे का रोडमैप
प्रशासन का लक्ष्य है कि राज्य के हर आंगनवाड़ी केंद्र तक योजना पहुंचे. पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाया जा रहा है. सरकार बच्चों को देश का भविष्य मानते हुए उनके पोषण में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती. इस योजना से स्वस्थ और स्मार्ट पीढ़ी तैयार होने की उम्मीद जगी है.